माहे रमजान में बताए जकात से जुड़े तमाम कायदे
भिलाई। पवित्र रमजान के महीने में मरकजी मस्जिद पावर हाउस कैंप-2 में जकात को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। दारुल कजा भिलाई के शहर काजी मुफ्ती मोहम्मद सोहेल ने यहां लोगों के सामने जकात का हुक्म और हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम का नूरानी तरीका शरीयत की हद में बयान किया।
मुफ्ती मोहम्मद सोहेल ने बताया कि हर बालिग, आकिल मोमिन मर्द और औरत पर साहिबे निसाब को पूरा करने पर जकात देना फ़र्ज़ है। जिनके पास साढ़े सात तोला सोना या साढ़े बावन तौला चांदी हो या इनमें से किसी एक की रकम के बराबर नगद मौजूद हो उस पर जकात देना होगा। इसी तरह सालाना कारोबार के बाद आज के दौर में साढ़े बावन तोला चांदी की कीमत के बराबर की रकम हो, जिस पर साल गुजर गया हो वो भी उसमें 2.5 फीसदी निकाल कर जकात अदा करे।
उन्होंने बताया कि जकात माल,सोना, चांदी, जानवर, फ़सल और मौजूदा दौर में कारोबार रियल एस्टेट,वो मकान जिससे किराया आता हो ,वो जमीन जिसको (प्लॉट) मुनाफे के इरादे के लिए खरीद रखा है उसकी मूल कीमत का 2.5 फीसदी निकालनी चाहिए। जकात किसी फकीर, मुसाफिर, कर्जदार, यतीम ,बेवा मिस्कीन (जिसके पास खाने पीने) का कोई इंतजाम ना हो , को दे सकते हैं। वहीं सैय्यद परिवार जो हजरत मोहम्मद सल्लु अलैहिस्सलाम की खानदान से हो ,हाशमी खानदान और सगी मां और बाप, बेटा-बेटी,दादा-दादी और नाना-नानी को नहीं दे सकते हैं। इनको जकात के अलावा सिर्फ मदद करने माल या रकम देना जायज है। उन्होंने कहा कि जकात सदका दर हकीकत अल्लाह की तरफ से एक बेहतरीन निजाम है जो रसूलों ओर नबियों के जरिए इंसानियत पर बेहतरीन समाज बनाने में अहम किरदार रखता है। मुफ्ती साहब ने कहा कि अल्लाह को तुम्हारे माल की कोई जरूरत नहीं वो तो तकवा (धर्मपरायणता) देखना चाहता है।
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