दुर्ग! छत्तीसगढ़ के अतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त धार्मिक स्थल सिलयारी धाम के आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री चाय वाले बाबा का ज्ञान यज्ञ इन दिनों चंडी मंदिर शिव पारा में चल रही है। 21 फरवरी से 1 मार्च तक आयोजित इस कथा में लोगों के भूत और भविष्य को एक मुट्ठी चावल और जसवंत के लाल फूल से बतायी जाती हैं।
कथा में उमड़ रही भीड़ इस बात का प्रमाण है कि लोग अपनी परेशानियों को दूर करने के लिए इस धार्मिक आयोजन में भाग ले रहे हैं। चाय वाले बाबा, जिनका नाम सुनते ही लोगों के मन में विश्वास और श्रद्धा का संचार होता है, हर दिन सैकडों की संख्या में श्रद्धालुओं को अपने अद्भुत अनुभवों से चमत्कृत कर रहे हैं। वे विशेष रूप से लोगों की तकलीफों को दूर करने में मदद कर रहे है. जिसके कारण हर कोई इस आयोजन का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक रहता है।
आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री जी ने बताया कि कलयुग का प्रभाव ये है कि लोग गौ सेवा नहीं हो रही है, मां-बाप की सेवा नहीं हो रही है, मा-बाप को मंदिर नही ले जाते है, परंतु कुत्ते को घुमाने ले जाते है, ऐसे में कैसे सनातन की रक्षा होगी। शास्त्री जी ने दान की महिमा बताते हुए बताया कि जीवन में दान करते रहना चाहिए दान के बिना जीवन में कोई सार नहीं है दुनियां में सबसे बड़ा दानी कर्ण है जिसने श्री कृष्ण को अपने घर के चौखट एवं बिस्तर की चंदन लकड़ी भेट कर दी। कौरव व पाण्डव दोनों के पक्ष में धर्म के अवतार थे पाण्डवो के पक्ष में युधिष्ठिर व कौरव के पक्ष में विधुर धर्म के अवतार थे, परंतु कौरव के पक्ष में हमेशा धर्म का अपमान होता था घर में माता-पिता का अपमान होता था ऐसे घर में कभी धर्म का और प्रभु का वास नही हो सकता है, तो निश्चित पतन प्रारंभ हो जाता है। मनुष्य को अपने कर्मों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, कर्म अच्छा है तो धन भी अच्छे रास्ते में लगेगा, सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए और भोजना हमेशा आराम से चबाकर करना चाहिए।
श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन भक्तों को धार्मिक ज्ञान के साथ-साथ जीवन के सही मार्ग पर चलने के प्रेरणा देने के उद्देश्य से किया गया है। इस आयोजन ने क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार किया है, और इसके माध्यम से हर व्यक्ति अपनी परेशानियों से निजात पाने की उम्मीदें लेकर कथा स्थल पर पहुंच रहा है।
आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री जी की कथा में गूंजते भक्ति भाव व चमत्कारी आशीर्वाद ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया है। धार्मिक श्रद्धा और विश्वास से भरा यह आयोजन चंडी मंदिर शिव पारा में 1 मार्च तक जारी रहेगा, और भक्तों का जन सैलाब इसी तरह बढ़ता रहेगा।
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