दुर्ग। 'मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0' अभियान के अंतर्गत जिला मध्यस्थता केंद्र, दुर्ग ने एक अनूठी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र के विशेष प्रयासों और कुशल मध्यस्थों की सूझबूझ से एक ही परिवार से संबंधित वर्षों पुराने और जटिल मुकदमों को राजीनामे के माध्यम से सुलझा लिया गया है। अनिता (पत्नी) और राजेश (पति) काल्पनिक नाम के बीच पिछले कई वर्षों से कानूनी विवाद चल रहा था। दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि न्यायालय में धारा 323, 506, 498 ए भा. दं.सं., घरेलू हिंसा, भरण-पोषणः, धारा 420 भा.दं.सं. धोखाधड़ी तथा विवाह विच्छेद के कुल 5 अलग-अलग मामले लंबित थे।
अभियान के तहत, मध्यस्थता केंद्र दुर्ग ने पाया कि ये सभी मामले एक ही पक्षकारों से संबंधित हैं और इनके कारण न केवल न्यायालय का समय नष्ट हो रहा है, बल्कि दोनों पक्षों का सामाजिक और मानसिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञ मध्यस्थों की टीम ने दोनों पक्षों के साथ कई दौर की काउंसलिंग की। चर्चा के दौरान पक्षकारों को कानूनी जटिलताओं के बजाय भविष्य की शांति और आपसी सहमति के महत्व को समझाया गया। 'मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0' की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्षों को अपनी शिकायतों को भुलाकर एक नई शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया गया।
अथक प्रयासों के बाद, पति-पत्नी ने आपसी सहमति से अपने सभी 5 प्रकरणों को वापस लेने और राजीनामा करने का निर्णय लिया। दोनों पक्षों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में सुलह पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते से न केवल उनके बीच के आपराधिक और दीवानी मामले समाप्त हुए, बल्कि समाज में 'विवाद से विश्वास' का एक सकारात्मक संदेश भी गया।
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सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।
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