दुर्ग। अखाड़ा महासंघ छत्तीसगढ़ के संरक्षक एवं पारंपरिक अखाड़ा संस्कृति के सशक्त स्तंभ शंभू यादव का दिनांक 12 जनवरी 2026 को प्रातः 6 बजे निधन हो गया। वे 98 वर्ष के थे। वे दुर्ग शहर के गोंड पारा के निवासी थे। उनका अंतिम संस्कार शिवनाथ मुक्ति धाम में विधिवत रूप से संपन्न हुआ।
स्वर्गीय शंभू यादव बल भीम अखाड़ा के उस्ताद थे। उन्होंने जीवनभर अखाड़ा परंपरा और आत्मरक्षा प्रशिक्षण के लिए कार्य किया। वे गांव-गांव जाकर युवाओं को लाठी, भाला, तलवार एवं अन्य पारंपरिक औजारों से आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देते थे। उनके मार्गदर्शन में दुर्ग शहर की विभिन्न बस्तियों में 20 से अधिक अखाड़ों का गठन किया गया, जिनका प्रदर्शन प्रतिवर्ष नागपंचमी के अवसर पर किया जाता रहा है।
स्व. शंभू यादव सरदार वल्लभ भाई पटेल स्कूल से चपरासी पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी अखाड़ा खेल को बढ़ावा देने में सक्रिय रहे। वे यादव समाज के पुराने गौटिया के रूप में भी सम्मानित माने जाते थे।
उनके निधन पर अखाड़ा महासंघ छत्तीसगढ़ के संयोजक राजेश ताम्रकार, अध्यक्ष सनत यादव, दासू ढीमर, पूर्व पार्षद लिखन साहू, मनीष यादव, शिव सपहा, मंजीत कुंभकार, यशपाल यादव, मांझा सेन, सुदामा पटेल, हिम्मत कुंभकार, अविनाश ढीमर, संतराम यादव, मुन्ना यादव, गोपाल कुंभकार, जीतू ढीमर एवं रामचंद्र ठाकुर सहित अन्य गणमान्य नागरिकों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
स्वर्गीय शंभू यादव का योगदान छत्तीसगढ़ की अखाड़ा परंपरा और युवाओं के शारीरिक व मानसिक विकास में सदैव स्मरणीय रहेगा।
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