दुर्ग/ नगपुरा। आज श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ, नगपुरा में मेटस विश्वविद्यालय रायपुर के शैक्षणिक सेवा दल का आगमन हुआ। विश्वविद्यालय द्वारा "विद्वत मिलन समारोह" का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के लगभग 250 से अधिक प्रोफेसर-व्याख्याता-शिक्षक गणों ने तीर्थपति श्री उवसग्गहरं पार्श्व प्रभु के दर्शन-वंदन के साथ भजन से जुड़कर परमात्म भक्ति का लाभ लिया! तीर्थ परिसर में संचालित श्री पार्श्व गौ सेवालय (गौशाला) में हरा चारा-गुड़-फल अर्पित कर गौ सेवा किए! विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गजराज पगारिया, कुलपति डॉ. के.पी.यादव, रजिस्ट्रार गोविन्दानंद पंडा, प्रबंध संचालक प्रियेश पगारिया के नेतृत्व में तीर्थ के प्रवचन सभागृह में धर्मसभा का आयोजन हुआ।
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धर्मसभा को पू. साध्वी श्री लक्ष्ययशा श्री जी म.सा. ने मंगलाचरण के साथ प्रारंभ किया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्याख्यात्री प.पू. साध्वी श्री लब्धियशा श्री जी म.सा. ने फरमाया कि श्रमण भगवान श्री महावीर स्वामी ने श्रद्धा-ज्ञान-और आचरण को शाश्वत् सुख का मार्ग बताया। सम्यक् दर्शन सम्यक ज्ञान और सम्यक् चारित्र ही मोक्ष मार्ग का साधन है। तीनों के केन्द्र में ज्ञान को रखा गया है! "ज्ञानस्य फलं विरति "। जिस तरह से देहली पर रखा हुआ दीपक चौखट के अंदर और बाहर दोनों ओर को प्रकाशित करता है वैसे ही सम्यक् ज्ञान से सम्यक दर्शन और सम्यक् चारित्र परिपक्व होती है। भारतीय शिक्षा पद्धति में पहले गुरुकुल होता था। और गुरुकूल में कुलपति और कुलाधिपति का पद होता था।

आज विश्व विद्यालय में होता है। जहाँ गुरु की छत्रछाया में कुल (शिष्यों का समूह) ज्ञान प्राप्ति करते थे वह गुरुकुल होता था। आदर्श व्यक्ति समाज की उन्नति और तरक्की के लिए सोचते है। एक आदर्श नेतृत्व पूरी टीम को साथ लेकर चलता है,और उनके क्षमता अनुसार सेवा लेता है। मेटस विश्वविद्यालय द्वारा तीर्थ यात्रा के साथ सत्संग और धर्म की बाते / ज्ञान की परिचर्चा के लिए आज "विद्वत-मिलन समारोह" का आयोजन किया गया। यह एक प्रकार से भारतीय संस्कृति की गुरुकुल परम्परा का अनुकरण है, जो प्रशंसनीय है। इस विश्वविद्यालय से बहुमुखी प्रतिभाओं का विकास हो। यहां के विद्यार्थी एक अच्छे नागरिक बनकर राष्ट्र की सेवा करें। यह शुभकामना है।
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