दुर्ग। ब्रह्मऋषि वेदांती सेवा मंडल दुर्ग भिलाई द्वारा बाफना मंगलम दुर्ग में श्रद्धांजलि सभा एवं सुंदरकांड का पाठ आयोजित किया गया। श्रीमद्वाल्मीकीयरामायण के वैदुष्यपूर्ण व्याख्याता, सनातन धर्म के ओजस्वी प्रवक्ता, राजनीति एवं राष्ट्रचिंतन के प्रखर स्वर, पूर्व सांसद तथा श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के सशक्त, सक्रिय एवं अविचल स्तम्भ रहे डॉ. रामविलास वेदान्ती जी महाराज का साकेतवास समस्त राष्ट्र, रामभक्त समुदाय के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी पूर्ति किसी भी कालखंड में संभव नहीं प्रतीत होती। उनका महाप्रयाण केवल एक देहधारी संत का विलय नहीं, अपितु एक वैचारिक युग, एक संघर्षशील परंपरा तथा एक तपस्वी जीवन-दर्शन का लोकांतरण है।
वेदान्ती जी महाराज का जीवन श्रीरामकथा की जीवंत व्याख्या था। वे केवल शास्त्रों के ज्ञाता ही नहीं, अपितु शास्त्रानुकूल जीवन जीने वाले महापुरुष थे। श्रीमद्वाल्मीकीयरामायण पर उनकी व्याख्या में जहाँ एक ओर वेद-वेदान्त की गूढ़ता का प्रकाश था, वहीं दूसरी ओर जनसामान्य के हृदय को स्पर्श करने वाली सरसता एवं भावप्रवणता भी थी। उनके वचन केवल श्रवण के विषय नहीं थे, अपितु आत्मबोध और राष्ट्रबोध की प्रेरणा देने वाले सूत्र थे। वे रामकथा को केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-मूल्यों, मर्यादा, कर्तव्य और राष्ट्रधर्म का जीवंत घोष मानते थे।
श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में उनकी भूमिका ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय रही। उन्होंने इस आंदोलन को केवल एक धार्मिक संघर्ष न मानकर, भारत की सांस्कृतिक आत्मा की पुनर्स्थापना का अभियान घोषित किया। अयोध्या की पावन भूमि पर उन्होंने वर्षों तक तप, त्याग और संघर्ष का वरण किया। कारावास, राजनैतिक दबाव, सामाजिक आलोचना—इन सबको उन्होंने प्रभु श्रीराम की लीला मानकर सहज भाव से स्वीकार किया। उनके लिए रामलला का मंदिर केवल ईंट-पत्थरों का निर्माण नहीं, बल्कि सहस्राब्दियों से पीड़ित सनातन चेतना का पुनर्जागरण था।
राजनीतिक क्षेत्र में भी वेदान्ती जी महाराज का व्यक्तित्व उतना ही तेजस्वी था। पूर्व सांसद के रूप में उन्होंने संसद के मंच से भी राष्ट्र, धर्म और संस्कृति की निर्भीक वाणी को प्रतिष्ठित किया। वे सत्ता के नहीं, सत्य के साधक थे। राजनीति उनके लिए साध्य नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का साधन थी। उनकी स्पष्टवादिता, वैचारिक दृढ़ता और निर्भय अभिव्यक्ति ने उन्हें एक विशिष्ट स्थान प्रदान किया।
उनका साकेतवास ऐसे समय में हुआ है, जब श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का स्वप्न साकार हो चुका है। यह प्रभु श्रीराम की अनुकंपा ही है कि वेदान्ती जी महाराज अपने जीवनकाल में उस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने, जिसके लिए उन्होंने अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया था। यह उनके तप और पुण्य का ही प्रतिफल था।
श्रद्धांजलि सभा में दुर्ग ग्रामीण के विधायक ललित चंद्राकर , दुर्ग शहर की प्रथम नागरिक महापौर श्रीमती अलका बघमार, केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन, भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक प्रदेश भाजपा के मंत्री जितेंद्र वर्मा भाजपा नेता अजय तिवारी नरसिंह भूतडा विजय अग्रवाल मनोज अग्रवाल बद्री विशाल सिंह शिवेंद्र परिहार राजेंद्र पाघ्ये नवीन पवार विनायक नातू अरुण सिंह रजनीश वैष्णव रमन बृजपुरिया नीरज सिंह राठौड़ जगबीर सिंह राघव कौशल साहू साजन जोसेफ गोपी राम साहू वीरेंद्र तिवारी मनोज सोनी संजय शुक्ला कुमुद द्विवेदी बनी सोनी शशि साहू उमा भारती साहू मधु शर्मा कल्पना जोशी सरस्वती साहू नीलेश अग्रवाल कंचन शुक्ला महेश जैन डीके सिंह द्रोणाचार्य द्विवेदी संतोष वर्मा संतोष सोनी अमर यादव अनिल यादव भारतेंदु गौतम कृष्ण निर्मलकर के साथ सैकड़ो की संख्या में गुरुजी से स्नेह रखने वाले बंधु उपस्थित रहे महाराज जी की कथा दुर्ग शहर के पद्मनापुर मैदान विद्युत नगर जवाहर नगर हुडको भिलाई एवं विशाल हिंदू सम्मेलन आर्य नगर में होने के कारण वेदांती महाराज जी को जानने वाले लोगों की बहुत बड़ी संख्या इस क्षेत्र में है।
संपादक- पवन देवांगन
पता - बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)
ई - मेल : dakshinapath@gmail.com
मो.- 9425242182, 7746042182
हिंदी प्रिंट मीडिया के साथ शुरू हुआ दक्षिणापथ समाचार पत्र का सफर आप सुधि पाठकों की मांग पर वेब पोर्टल तक पहुंच गया है। प्रेम व भरोसे का यह सफर इसी तरह नया मुकाम गढ़ता रहे, इसी उम्मीद में दक्षिणापथ सदा आपके संग है।
सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।
Copyright 2024-25 Dakshinapath - All Rights Reserved
Powered By Global Infotech.