-कलेक्टर को सौंपे सुझाव, गाइडलाइन दरों के पुनः परीक्षण की मांग
दुर्ग। छत्तीसगढ़ में भूमि की शासकीय (गाइडलाइन) दरों में की गई 150 से 400 प्रतिशत तक की अप्रत्याशित वृद्धि को लेकर किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ किसान मितान महासंघ ने जिला मूल्यांकन समिति, दुर्ग के अध्यक्ष/कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर गाइडलाइन दरों के पुनः परीक्षण एवं जनहित में न्यायोचित संशोधन की मांग की है।
किसान मीतान महासंघ के कमलेश ठाकुर, राजेश सिंह,राजेश शुक्ला ने अपने सुझावों में कहा है कि पंजीयन विभाग द्वारा निर्धारित नई गाइडलाइन दरें वर्तमान दरों की तुलना में 3 से 4 गुना अधिक हैं, जो आम जनमानस और किसानों की पहुंच से बाहर हो गई हैं। इससे भूमि की खरीदी-बिक्री एवं पंजीयन कराना अत्यंत कठिन हो गया है।
-पंजीयन शुल्क का अतिरिक्त भार...
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि वर्ष 2018-19 में स्टाम्प शुल्क 6.25 प्रतिशत एवं पंजीयन शुल्क 0.8 प्रतिशत था। वर्ष 2019-20 में गाइडलाइन दरों में 30 प्रतिशत छूट देकर पंजीयन शुल्क 4 प्रतिशत किया गया। वर्ष 2024-25 में 30 प्रतिशत की छूट समाप्त कर दी गई, लेकिन पंजीयन शुल्क यथावत रहा। अब 2025-26 में गाइडलाइन दरों में भारी वृद्धि के बावजूद स्टाम्प व पंजीयन शुल्क में कोई राहत नहीं दी गई, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। महासंघ ने पंजीयन शुल्क घटाने की मांग की है।
-कैपिटल गेन टैक्स का खतरा ...
ग्रामीण क्षेत्रों में हेक्टेयर दरों में अचानक वृद्धि से किसानों पर कैपिटल गेन टैक्स का अतिरिक्त भार पड़ने की आशंका जताई गई है। पूर्व सौदों और वर्तमान शासकीय दरों में अत्यधिक अंतर होने से किसानों को उनकी जमीन का वास्तविक मूल्य नहीं मिल पाएगा। इस विसंगति को दूर करने हेतु हेक्टेयर दरों में छूट देने की मांग की गई है।
-युक्तियुक्तकरण पर सवाल ..
महासंघ ने नगरीय क्षेत्रों में सभी वार्डों एवं क्षेत्रों के लिए एक समान कंडिका लागू किए जाने को अनुचित बताया। ज्ञापन में कहा गया कि सर्वसुविधायुक्त क्षेत्रों और स्लम, नदी डुबान, श्मशान घाट जैसे क्षेत्रों की दर एक समान करना व्यवहारिक नहीं है। कम से कम तीन अलग-अलग कंडिका निर्धारित करने की मांग की गई है।
-हेक्टेयर दर लागू करने से किसान प्रभावित ..
नगरीय क्षेत्रों से लगे निवेश ग्रामों एवं पेरी-अर्बन क्षेत्रों में वर्गमीटर दर समाप्त कर हेक्टेयर दर लागू किए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों की दरों में अत्यधिक वृद्धि हुई है। जबकि व्यवहारिक रूप से इन क्षेत्रों में भूमि की खरीदी-बिक्री वर्गमीटर में ही होती है। इससे न केवल किसान प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि शासन के राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
-भू-अर्जन मुआवजे में नुकसान की आशंका ..
पूर्व में 500 वर्गमीटर तक भूमि का मुआवजा वर्गमीटर दर से चार गुना दिया जाता था, लेकिन नई गाइडलाइन में हेक्टेयर दर से गणना का प्रावधान होने से किसानों को कम मुआवजा मिलने की संभावना है। महासंघ ने किसानों के हित में विशेष व्यवस्था करने की मांग की है।
-मुख्य मार्ग निर्धारण में त्रुटि ..
ग्रामीण क्षेत्रों में NH, SH, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं पक्की सड़कों को एक समान मुख्य मार्ग मानने से खेत की वास्तविक उपयोगिता के अनुसार मूल्य निर्धारण नहीं हो पा रहा है। महासंघ ने मार्ग एवं उपयोगिता के आधार पर पृथक-पृथक दरें तय करने की मांग की है।
अंत में छत्तीसगढ़ किसान मितान महासंघ ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि भूमि की शासकीय दरों में की गई अत्यधिक वृद्धि का पुनः परीक्षण कर जनहित एवं किसान हित में न्यायोचित निर्णय लिया जाए।
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