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पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय दुर्ग में 63वाँ स्थापना दिवस हर्षोल्लास से सम्पन्न

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-केंद्रीय विद्यालय देश का गौरवशाली श्रेष्ठ शिक्षण संस्थान: उमाशंकर मिश्र
-भारत का स्वर्णिम गौरव  केंद्रीय विद्यालय लाएगा’
दुर्ग।
पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय दुर्ग में केंद्रीय विद्यालय संगठन का 63वाँ स्थापना दिवस अत्यंत उत्साह, गरिमा एवं सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर देशभक्ति, ज्ञान और संस्कारों के रंग में सराबोर दिखाई दिया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि केंद्रीय विद्यालय की पूर्व छात्रा एवं वर्तमान में पॉलिटेक्निक कॉलेज दुर्ग में लेक्चरर सुश्री अंकिता साहू रहीं। उन्होंने अपने छात्र जीवन की स्मृतियाँ साझा करते हुए कहा कि केंद्रीय विद्यालय ने उन्हें अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन मूल्यों की वह नींव दी, जिसने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया। आज भी विद्यालय से जुड़ी यादें मार्गदर्शक की तरह साथ चलती हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. श्रावणी सिंह (संगीत शिक्षिका) के निर्देशन में प्रस्तुत स्वागत गीत से हुआ। इसके पश्चात छात्रा सान्वी ओझा एवं समूह द्वारा प्रस्तुत शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। छात्रा कुमारी सान्वी ओझा ने सशक्त भाषण प्रस्तुत किया, वहीं कुमारी श्रेया साहू के काव्य पाठ ने भावनात्मक वातावरण रच दिया।
 रामाशीष चौहान द्वारा प्रेरक शिक्षक-भाषण प्रस्तुत किया गया। डॉ. अजय आर्य ने श्लोक-व्याख्या सहित काव्य पाठ प्रस्तुत करते हुए ‘तत्त्वं पूषन्’ की भावभूमि को केंद्रीय विद्यालय के मूल आदर्शों से जोड़ा और अपनी कविता की पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं— ‘केंद्रीय विद्यालय का आंगन मन में विश्वास जगाता है, तमसो मा ज्योतिर्गमय का नाद नित्य सुनाता है।’

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प्राथमिक विभाग के विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर आधारित लघु नाटिका का प्रभावशाली मंचन किया गया, जिसका निर्देशन श्रीमती मोनिका श्रीवास्तव ने किया।
इस अवसर पर विद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिकाएँ श्रीमती नीति दास, श्रीमती शीला चाको, श्रीमती राहत तसनीम तथा भूतपूर्व छात्राएँ एवं केंद्रीय विद्यालय संगठन से जुड़ी श्रीमती उषा शर्मा, श्रीमती बिंदु शिवराजन, श्रीमती एस.वी.एस. गायत्री एवं सुश्री श्रेया साहू को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के प्रभारी पुरुषोत्तम साहू रहे।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य उमाशंकर मिश्र ने कहा- ‘केंद्रीय विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला है। यहाँ विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रीय चेतना भी प्राप्त होती है। 63 वर्षों की यह यात्रा निरंतर गुणवत्ता, नवाचार और मूल्यों की यात्रा रही है।’ उन्होंने सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ दीं।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय विद्यालय संगठन की स्थापना वर्ष 1963 में की गई थी। वर्तमान में देशभर में 1289 केंद्रीय विद्यालय संचालित हैं, साथ ही मॉस्को, तेहरान एवं काठमांडू में भी केंद्रीय विद्यालय कार्यरत हैं। केंद्रीय विद्यालय संगठन आज देश की श्रेष्ठ एवं विश्वसनीय शिक्षा संस्थाओं में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।
कार्यक्रम का समापन भारत का स्वर्णिम गौरव केंद्रीय विद्यालय लाएगा, राष्ट्रगान एवं आभार प्रदर्शन के साथ हुआ। विद्यालय कप्तान अनमोल द्वारा केंद्रीय विद्यालय संगठन की स्थापना दिवस पर विद्यालय कप्तान अनमोल के नेतृत्व में शपथ वाचन किया गया। यह शपथ 2400 बच्चों के साथ-साथ 100 शिक्षकों ने साथ-साथ ली। शपथ में देश और देशवासियों के विकास एवं उत्थान के लिए समर्पण से कार्य करने को दोहराया गया।

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-केंद्रीय विद्यालय संगठन : संक्षिप्त परिचय, उपलब्धियाँ                                                 केंद्रीय विद्यालय संगठन की स्थापना वर्ष 1963 में भारत सरकार द्वारा की गई थी। इसका प्रमुख उद्देश्य स्थानांतरणशील केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों, रक्षा कर्मियों तथा आम नागरिकों के बच्चों को देशभर में एक समान, गुणवत्तापूर्ण और मूल्यपरक शिक्षा उपलब्ध कराना है। केंद्रीय विद्यालय संगठन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध है तथा शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों में अनुशासन, राष्ट्रीय एकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक चेतना का विकास करने पर विशेष बल देता है।
आज केंद्रीय विद्यालय संगठन देश की सबसे विश्वसनीय एवं उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थाओं में गिना जाता है। वर्तमान में देश-विदेश में 1289 केंद्रीय विद्यालय संचालित हैं, जहाँ आधुनिक शिक्षण पद्धतियाँ, नवाचार, खेल, कला, विज्ञान एवं सह-पाठ्य गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास किया जा रहा है। शैक्षणिक उत्कृष्टता, राष्ट्र निर्माण में योगदान और शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर नवाचार के कारण केंद्रीय विद्यालय संगठन ने अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

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