दुर्ग। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं माननीय उच्चतम न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (एमसीपीसी) के संयुक्त निर्देशन में 01 जुलाई 2025 से 07 अक्टूबर 2025 तक कुल 90 दिवस तक चलने वाले कार्यक्रम "मीडियेशन फॉर द नेशन" के संबंध में न्यायालयीन प्रणाली में लंबित वादों के शीघ्र और सौहार्दपूर्ण निपटारे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा मध्यस्थता की एक नई पहल की शुरुआत की जा रही है।
न्यायालयों में अवकाश के दिन आमतौर पर शांति रहती है, लेकिन अवकाश के दिन भी न्याय तक त्वरित पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला न्यायालय दुर्ग के मध्यस्थता केन्द्र में स्थानीय अवकाश 28 अगस्त 2025 को भी न्याय की गूंज सुनाई दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्यस्थता केन्द्र प्रभारी एवं मध्यस्थतों ने व्यक्तिगत सुविधाओं का त्याग करते हुए न्याय दान के प्रति उनके कर्तव्यों को प्राथमिकता देते हुए अवकाश के बावजूद तीन प्रकरणों की मध्यस्थता सुनवाई आयोजित की गई और उभयपक्ष के मध्य आपसी समझौता हो गया।
यह उल्लेखनीय है कि अवकाश के दिन भी न्यायालय परिसर स्थित मध्यस्थता केन्द्र दुर्ग में यह कार्यवाही सम्पन्न की गई, जो न्यायिक सेवा के प्रति समर्पण एवं मध्यस्थता की महत्ता को दर्शाती है। इस प्रक्रिया में पक्षकारों ने विवाद को सुलझाने हेतु आपसी समझ और सहयोग की भावना प्रदर्शित की। परिणामस्वरूप लम्बे समय से लंबित विवाद का शीघ्र निराकरण संभव हो सका।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सामंजस्य से संचालित इस पहल का मुख्य उद्देश्य न्याय तक सभी की पहुँच सुनिश्चित करना तथा मध्यस्थता के माध्यम से समाज में मैत्रीपूर्ण विवाद निराकरण की संस्कृति को बढ़ावा देना है। अवकाश के दिन में की गई यह कार्यवाही इस बात का प्रतीक है कि न्याय की राह कभी बंद नहीं होती।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पहल को देखकर पक्षकारों ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि "न्यायालय में वर्षों तक चलने वाले विवाद का निराकरण मध्यस्थता की मदद से अवकाश के दिन में भी कुछ ही समय में हो गया।"
मध्यस्थता केन्द्र दुर्ग की इस अनोखी पहल ने न केवल विवाद सुलझाया, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि आपसी सहयोग और संवाद से अवकाश के दिनों में भी प्रत्येक समस्या का समाधान संभव है।
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