दुर्ग। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में केवाईसी की अनिवार्यता अब गरीब राशन कार्डधारी परिवारों के लिए बड़ी समस्या बनते जा रही है। तकनीकी खामियों और प्रक्रिया संबंधी दिक्कतों के कारण कई पात्र परिवारों को समय पर राशन नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं। केवाईसी प्रक्रिया में सबसे अधिक परेशानी परिवार के छोटे बच्चों और बुजुर्ग सदस्यों के सत्यापन को लेकर सामने आ रही है। बायोमेट्रिक मिलान में दिक्कत, आधार लिंकिंग की समस्या और नेटवर्क संबंधी तकनीकी बाधाओं के चलते इन वर्गों का केवाईसी पूरा नहीं हो पा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि यदि परिवार के एक भी सदस्य का केवाईसी अधूरा रह जाता है, तो पूरे परिवार का राशन कोटा बंद कर दिया जा रहा है। इस गंभीर मुद्दे पर पूर्व सभापति एवं कांग्रेस नेता राजकुमार नारायणी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि केवाईसी की अनिवार्यता के चलते पात्र गरीब परिवारों को राशन से वंचित करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि तकनीकी खामियों को जल्द दूर करते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे किसी भी पात्र परिवार का राशन बंद न हो। इस व्यवस्था का सीधा असर गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ रहा है। राशन नहीं मिलने के कारण उन्हें बार-बार खाद्य विभाग के दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन वहां भी उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिल रहा। परेशान होकर कई परिवार मजबूरी में निजी किराना दुकानों से महंगे दामों पर खाद्यान्न खरीदने को विवश हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। पूर्व सभापति एवं कांग्रेस नेता राजकुमार नारायणी नेे कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य गरीबों को राहत देना है, न कि उन्हें परेशान करना। इसलिए प्रशासन को चाहिए कि केवाईसी प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और विशेष रूप से बच्चों एवं बुजुर्गों के लिए वैकल्पिक सत्यापन की व्यवस्था लागू की जाए। यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में गरीब परिवार खाद्य सुरक्षा से वंचित हो सकते हैं। ऐसे में शासन और संबंधित विभागों को त्वरित हस्तक्षेप करते हुए जमीनी स्तर पर राहत पहुंचाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
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