होम / बड़ी ख़बरें / बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्र रक्षा महायज्ञ में शामिल हुए डॉ. अजय आर्य
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-बच्चों को वीर बनाने की जिम्मेदारी माताओं की
-वीर बनकर ही सुख का उपभोग कर सकते हैं आचार्य डॉ अजय आर्य
दुर्ग। आर्य समाज मंदिर मारतहल्ली बेंगलुरु में देश के शहीदों कुछ श्रद्धांजलि देकर आत्मा शांति की प्रार्थना की गई। भारत के वीर पराक्रमी सैनिक योद्धाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्ति की गई। इस अवसर पर राष्ट्र रक्षा महायज्ञ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन एसपी कुमार एवं कुमार अभिमन्यु ने किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भिलाई के वैदिक विद्वान आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा- आज दुनिया में मदर्स डे मनाया जा रहा है। वेदों में पृथ्वी या भूमि को माता के रूप में स्वीकार किया गया है और जनमानस को उसके पुत्र के रूप में स्मरण किया गया है। अथर्ववेद की ऋचा कहती है कि भूमि माता है और मैं उसका पुत्र हूं। महाभारत के यक्ष प्रश्न में युधिष्ठिर से पूछा गया कि इस धरती पर धरती से अधिक भारी कौन है और आसमान से अधिक ऊंचा कौन है? हमें यह प्रश्न नटपटा या गुप्त जैसा लगेगा क्योंकि पृथ्वी में रहकर की कोई पृथ्वी से अधिक भारी कैसे हो सकता है? धरती पर रहकर आसमान से ऊंचा कोई कैसे हो सकता है? किंतु उत्तर देने वाला व्यक्ति युधिष्ठिर है जिसे धर्मराज कहा गया है। युधिष्ठिर जवाब देते हुए कहते हैं की धरती पर भूमि से अधिक भारी माता है। माता के त्याग तपस्या समर्पण और निस्वार्थ भाव का कोई बदला नहीं चुका सकता। इसलिए मातृ दिवस शायद मनाया जाता है। वैदिक शास्त्रों में मातृ देवो भव कहा गया है। माता को देवता के रूप में स्वीकार करके उसकी पूजा की गई है। शंकराचार्य ने लिखा है की माता को माता नहीं होती पुत्र भले ही को पुत्र हो जाता है। आज भारत माता के लाल भारत माता की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर कर रहे हैं। हम इस धरती माता का भी अभिनंदन करते हैं और उनके वीर पुत्रों का भी अभिनंदन करते हैं।आर्य समाज के संबंध से इस संकल्प को दोहराते हैं कि जब भी भारत पर संकट आएगा हम उसकी सेवा के लिए प्रथम पंक्ति पर खड़े होंगे। यक्ष के प्रश्नों का जवाब देते हुए युधिष्ठिर ने बताया कि पिता का स्थान आसमान से भी अधिक ऊंचा है। भारत के जवानों को भारत के निवासियों को भारत के पुत्रों को वीर बना होगा। शास्त्र और शास्त्र दोनों का अभ्यास करना होगा। बौद्धिक और मानसिक रूप से परिपक्व होकर के हम देश और समाज की सेवा कर सकते हैं। 2 मिनट की प्रेयर में प्रार्थना सभा में गिर जाने वाले विद्यार्थी बच्चे देश की सेवा कैसे करेंगे? बच्चों को 2 मिनट की मैगी से बाहर निकलिए। पौष्टिक दलिया और भारतीय फल-पल मेवा मिष्ठान खिलाकर के मजबूत कीजिए यह जिम्मेदारी माता की है। माता को अपने बच्चों को पौष्टिक आहार और पौष्टिक विचार देकर के वीर बनाना होगा।

देश समाज और संस्कृति में आजकल व्यक्तित्व निर्माण जीवन कौशल सीखने की खूब चर्चा होती है। हमारे ग्रंथो में लिखा है की पांच चीज मनुष्य को स्वीकार्य बनती है या उसके व्यक्तित्व को परिष्कृत करती है। यह पांच चीज हैं वस्त्र, वपू, वाणी, विद्या, विनय जो इन पांच चीजों को आत्मसात कर लेता है उसका व्यक्तित्व दूसरों को आकर्षित करता है। जब भी आप कभी वस्त्र पहने तो देखिए कि आप कहां जा रहे हैं। पिछले दिनों में एक गुरुद्वारे की यात्रा में नांदेड़ में था। वहां पर बरमुंडा और वेस्टर्न ड्रेस पहनकर के एक स्त्री पुरुष प्रवेश कर रहे थे उनको रोक दिया गया। हमें इतना आधुनिक नहीं होना है कि हमें अपने धार्मिक स्थलों की मर्यादाओं का भी ज्ञान ना हो। वस्त्र को चयन करते समय ध्यान रखना चाहिए। नीति शतक में लिखा है कि अगर मूर्ख व्यक्ति भी अच्छे वस्त्र पहन ले तो वह सभा में विद्वानों की तरह पूजित हो जाता है। वपु का अर्थ है शरीर शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रतिदिन अभ्यास करना चाहिए। कम से कम 15 मिनट से आप शुरुआत कीजिए आसन करें प्राणायाम करें व्यायाम करें। शरीर के लिए क्या सही है इस बात का स्वयं चिंतन करें। आहार विहार विचार शरीर को पुष्ट करने वाले होने चाहिए। क्योंकि संसार के भोगों का उपभोग वही कर सकता है जिसका शरीर मजबूत हो। वेद में प्रार्थना की गई है कि हमारा शरीर चट्टानों जैसा मजबूत हो। आपकी वाणी मृदु है सरस है तो आपका व्यक्तित्व आकर्षक बन जाएगा। जीवन को बेहतर बनाने के लिए वाणी का उपयोग सही ढंग से करना चाहिए। मनुष्य बोलना सीख जाता है 6 महीने साल भर में। किंतु क्या कब कैसे बोलना है यह सीखने में पूरा जीवन लग जाता है। विद्या ज्ञान को ही चक्षु या नेत्र कहा गया है। ज्ञान को प्राप्त करके ही व्यक्ति अपने जीवन को श्रेष्ठ बन सकता है। इसलिए विद्या का अभ्यास लगातार करना चाहिए। विनय का अर्थ है विनम्रता। विद्या का आभूषण विनम्रता ही है। इसलिए कहते हैं विद्या ददाती विनयम।
कार्यक्रम के अंत में एसपी कुमार के नेतृत्व में वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देगी और उनके प्रति कृतज्ञता की गई। आर्य समाज के प्रधान कर्नल एच सी शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। देश के बहादुरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया की श्रेष्ठतम सेना में से हमारी सेना है। कार्यक्रम में नन्हे बच्चों ने भजन प्रस्तुत किया। भोजन प्रसाद के पश्चात शांति पाठ के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
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