-अरसनारा में सामुदायिक मध्यस्थता जागरूकता अभियान, विधि विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक से दिया संदेश
दुर्ग। कानून की जानकारी जब किताबों और अदालतों से निकलकर गांव की चौपाल तक पहुंचती है, तो वह आमजन के लिए अधिक सहज और प्रभावी बन जाती है। इसी उद्देश्य से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा ग्राम अरसनारा में सामुदायिक मध्यस्थता को लेकर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीणों को पारंपरिक व्याख्यान के बजाय नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई के विधि विद्यार्थियों ने ग्रामीण परिवेश से जुड़े विभिन्न विवादों को नाटक के माध्यम से प्रस्तुत किया। परिवार, पड़ोस, जमीन, रास्ते, पानी और आपसी मतभेद जैसे विषयों को सहज एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों ने समझाया कि हर विवाद का समाधान अदालत में मुकदमे के माध्यम से ही हो, यह आवश्यक नहीं है। कई छोटे और स्थानीय विवादों को बातचीत, आपसी सहमति और निष्पक्ष मध्यस्थता के माध्यम से समय रहते सुलझाया जा सकता है।
नुक्कड़ नाटक का मुख्य संदेश था—“विवाद बढ़ाएं नहीं, संवाद से समाधान करें।” विद्यार्थियों ने अभिनय के माध्यम से यह भी बताया कि समय रहते विवाद सुलझाने से न केवल अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचा जा सकता है, बल्कि परिवार, पड़ोस और समाज के बीच संबंध भी बेहतर बने रह सकते हैं।
-न्यायिक अधिकारियों ने ग्रामीणों और विद्यार्थियों से किया संवाद
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं), दुर्ग की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर उपस्थित रहे। न्यायिक अधिकारियों ने विधि विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक की सराहना करते हुए विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों से संवाद किया।
उन्होंने ग्रामीणों को सामुदायिक मध्यस्थता की उपयोगिता बताते हुए कहा कि छोटे विवाद यदि समय रहते बातचीत और आपसी समझ के माध्यम से सुलझ जाएं, तो इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचने के साथ-साथ सामाजिक और पारिवारिक संबंधों में भी कटुता कम की जा सकती है।
उन्होंने विधि विद्यार्थियों से कहा कि कानून की जानकारी तभी सार्थक है, जब उसे समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरल भाषा में पहुंचाया जाए। नुक्कड़ नाटक जैसे माध्यम से ग्रामीणों के बीच कानूनी जागरूकता पहुंचाना इसी दिशा में प्रभावी पहल है।
-पांच गांवों में चल रही सामुदायिक मध्यस्थता गतिविधियां
कार्यक्रम में ग्रामीणों को बताया गया कि सामुदायिक मध्यस्थता न्यायालयीन प्रक्रिया का विकल्प नहीं, बल्कि विवादों के प्रारंभिक स्तर पर संवाद और सहमति के माध्यम से समाधान की प्रभावी पहल है। पड़ोसी विवाद, रास्ते और पानी को लेकर मतभेद, पारिवारिक असहमति अथवा अन्य स्थानीय विवादों को समय रहते बातचीत से सुलझाने पर विवाद के बढ़ने और संबंधों में स्थायी कटुता आने की संभावना कम हो सकती है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता के लिए जिले के घुघसीडीह, ननकट्ठी, अरसनारा, निकुम एवं कुथरेल सहित पांच ग्रामों का चयन किया गया है। इन गांवों में चरणबद्ध रूप से जागरूकता, प्रशिक्षण, संवाद एवं मध्यस्थता से संबंधित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
- विद्यार्थी बने ‘पीस एंबेसडर’
अरसनारा में आयोजित कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि कानून की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों ने स्वयं ग्रामीणों के बीच पहुंचकर कानूनी विषयों को अभिनय और संवाद के माध्यम से प्रस्तुत किया। इससे ग्रामीणों को सामुदायिक मध्यस्थता की जानकारी सरल एवं मनोरंजक तरीके से मिली, वहीं विद्यार्थियों को भी कानून के व्यावहारिक पक्ष को समाज के बीच समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि “न्यायालय तक पहुंचने से पहले, संवाद तक पहुंचिए।” जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग की यह पहल विवादों को प्रारंभिक स्तर पर संवाद और सहमति से सुलझाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी जागरूकता और जनभागीदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
संपादक- पवन देवांगन
पता - बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)
ई - मेल : dakshinapath@gmail.com
मो.- 9425242182, 7746042182
हिंदी प्रिंट मीडिया के साथ शुरू हुआ दक्षिणापथ समाचार पत्र का सफर आप सुधि पाठकों की मांग पर वेब पोर्टल तक पहुंच गया है। प्रेम व भरोसे का यह सफर इसी तरह नया मुकाम गढ़ता रहे, इसी उम्मीद में दक्षिणापथ सदा आपके संग है।
सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।
Copyright 2024-25 Dakshinapath - All Rights Reserved
Powered By Global Infotech.