होम / दुर्ग-भिलाई / जीवन को सुखपूर्वक अनुशासित करे वही शास्त्र:आचार्य डॉ.दिव्य चेतन
दुर्ग-भिलाई
-छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा सेवा संस्थान द्वारा ऑनलाइन संस्कृत महोत्सव में काशी की शास्त्रार्थ परम्परा का प्रथम आयोजन
भिलाई। छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा सेवा संस्थान द्वारा ऑनलाइन संस्कृत महोत्सव में पहली बार काशी की शास्त्रार्थ परंपरा पर सफल आयोजन किया गया। इसमें संस्कृत प्रेमियों ने बड़ी संख्या में सक्रिय उपस्थिति दी। व्याकरण शास्त्र पर केन्द्रित इस विशेष पाण्डित्य पूर्ण संवाद में पूर्व पक्ष और उत्तर पक्ष में शास्त्रीय विमर्श हुआ। शास्त्रार्थ सभा अध्यक्ष काशी के वाचस्पति काशी रत्न आचार्य डॉ.दिव्य चेतन ब्रह्मचारी थे। पूर्व पक्ष से युवा पण्डित हर्ष मित्र एवं उत्तर पक्ष से युवा पंडित अंबरीश तिवारी ने क्रमशः तर्कों के अपना-अपना पक्ष रखा।
प्रमाणों के माध्यम से दोनों युवाचार्यों ने विनम्रतापूर्वक व्याकरण शास्त्र के सिद्धांतों को रखते हुए परम्परागत शास्त्रार्थ पद्धति के आधार पर विषय को स्पष्ट किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में काशी रत्न आचार्य डॉ.दिव्य चेतन ब्रह्मचारी ने कहा कि-जो शास्त्र सुखपूर्वक जीवन को अनुशासित करे वही शास्त्र है। यह केवल ज्ञान प्राप्ति का साधन नहीं, अपितु जीवन को अनुशासित और संस्कारित करने का मार्ग है। शास्त्रीय परम्परा समाज में शान्ति, आनन्द और सद्भावनाओं को बढ़ावा देती हैं।
कार्यक्रम का सफल संयोजन, सचिव डॉ. मनीष शर्मा ने किया। संस्थान विगत 7-8 दिन से लगातार ऐसे आयोजनों से लगातार संस्कृत प्रेमियों को जोड़े हुवे है। एक दिन पूर्व "छत्तीसगढ़ी भाषा पर संस्कृत का प्रभाव" विषय पर दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव के प्रो.ललित प्रधान का रोचक व्याख्यान हुआ। इसमें आचार्य डॉ.महेश चन्द्र शर्मा की पुस्तक "छत्तीसगढ़ में संस्कृत" का भी उल्लेख हुआ और संस्कृत प्रेमियों ने इसकी मुक्तकण्ठ से सराहना की। संस्थान के अध्यक्ष आचार्य नवीन शर्मा, संगठन सचिव आचार्य मुकेश चौबे, दुर्ग जिला संरक्षक आचार्य डॉ.महेश चन्द्र शर्मा, खैरागढ़ जिला संयोजिका डॉ.पूर्णिमा केलकर, दुर्ग ज़िला संयोजक हेमन्त शर्मा, रायपुर से उर्मि देवी, डॉ.निर्मला पाण्डेय, डॉ.रूपेन्द्र तिवारी एवं संस्कृत भारती के डॉ. दादूभाई त्रिपाठी समेत बड़ी संख्या में संस्कृत प्रेमी जन संस्कृत महोत्सव में संलग्न हैं। श्रावणी पूर्णिमा तक यह आयोजन चलेगा।
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