बड़ी ख़बरें

विज्ञान की प्रगति, लोभ की प्रवृत्ति और असीमित आवश्यकताएं दुख का सबसे बड़ा कारण : राष्ट्रसंत डॉ. मणिभद्र मुनि

51820082026122037whatsappimage2026-08-20at5.49.46pm.jpeg

दुर्ग। मनुष्य के जीवन का अंतिम और सर्वोच्च ध्येय मोक्ष है और मोक्ष ही जीवन की अंतिम मंजिल है। इस मंजिल तक शीघ्र पहुंचने का सर्वोत्तम मार्ग महाव्रत है, लेकिन यह अत्यंत कठिन एवं दुष्कर मार्ग है। इसके लिए संपूर्ण त्याग और संयम की आवश्यकता होती है, जो प्रत्येक व्यक्ति के लिए संभव नहीं है। इसी कारण भगवान महावीर ने श्रावक-श्राविकाओं के लिए अपेक्षाकृत सरल मार्ग के रूप में बारह व्रतों का विधान बताया—पांच अणुव्रत, तीन गुणव्रत और चार शिक्षाव्रत।
उक्त विचार जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब, दुर्ग में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत डॉ. मणिभद्र मुनि जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अणुव्रतों में दिग्व्रत का विशेष महत्व है। इसका मूल उद्देश्य मनुष्य की गतिविधियों और इच्छाओं की असीमित सीमा को नियंत्रित करना है। आज विज्ञान ने अभूतपूर्व प्रगति की है। प्राचीन काल में विज्ञान इतना विकसित नहीं था, इसलिए मनुष्य की आवश्यकताएं भी सीमित थीं। आज विज्ञान ने सुविधाओं के असीमित साधन उपलब्ध करा दिए हैं, लेकिन इनके साथ मनुष्य की इच्छाएं, लोभ और आवश्यकताएं भी निरंतर बढ़ती जा रही हैं। यही असीमित इच्छाएं अंततः मनुष्य के दुख का सबसे बड़ा कारण बनती हैं। सुविधाएं बढ़ने के साथ यदि संयम नहीं बढ़ा, तो सुख के साधन ही दुख का कारण बन जाते हैं।
-भाव जैसा होगा, भविष्य भी वैसा ही बनेगा
धर्मसभा को पुनीत मुनि जी महाराज एवं साध्वी डॉक्टर सृजना श्री जी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जैसा हमारा भाव होगा, वैसा ही हमें प्रभाव प्राप्त होगा और जैसा हमारा नेचर होगा, वैसा ही हमारा फ्यूचर होगा। जीवन में निरंतर गतिशील बने रहना आवश्यक है। नदी के समान निरंतर बहते रहने में ही उसकी पवित्रता और निर्मलता बनी रहती है, जबकि स्थिर जल में समय के साथ गंदगी जमा होने लगती है। इसी प्रकार मनुष्य को भी अपने विचारों, भावनाओं और जीवनशैली में निरंतर शुद्धता एवं सकारात्मकता बनाए रखनी चाहिए।
-दुर्ग में चल रही त्याग और तपस्या की श्रृंखला
जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब, दुर्ग में चातुर्मास के दौरान त्याग और तपस्या की अनुपम श्रृंखला चल रही है।  टीकाराम जी, श्रीमती मंजू संचेती, श्रीमती खुशबू बाधमार, ऋषिका संचेती, कविता श्रीश्रीमाल सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएं गुप्त रूप से तपस्या कर धर्म आराधना में लीन हैं। तपस्वियों की यह साधना समाज के लिए प्रेरणादायी बनी हुई है।
-प्रतिदिन हो रहा नवकार महामंत्र जप
चातुर्मास प्रारंभ होने के बाद से प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक सैकड़ों श्रद्धालुओं के सहयोग से नवकार महामंत्र जप अनुष्ठान निरंतर चल रहा है। आज का नवकार महामंत्र जप श्रीमती प्रेमीबाई, रमेश जी, प्रकाश जी एवं निर्मल जी झाबक परिवार की ओर से आयोजित किया गया। कल का जाप श्रीमती स्वरूप देवी एवं जितेंद्र जी नाहर परिवार की ओर से आयोजित किया जा रहा है।  कार्यक्रम का कुशल संचालन मंत्री राकेश संचेती ने किया।
-देशभर से गुरु दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु
चातुर्मास के दौरान देश के विभिन्न शहरों से गुरु दर्शन एवं धर्मलाभ के लिए श्रद्धालुओं का दुर्ग आगमन लगातार बना हुआ है। बाहर से आने वाले गुरु भक्तों के लिए जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब, दुर्ग में आवास एवं भोजन सहित अतिथि सत्कार की उत्तम व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं के स्वागत और सेवा-सत्कार का सुंदर संयोजन निरंतर चल रहा है।

एक टिप्पणी छोड़ें

Data has beed successfully submit

Related News

Advertisement

Popular Post

This Week
This Month
All Time

स्वामी

संपादक- पवन देवांगन 

पता - बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)

ई - मेल :  dakshinapath@gmail.com

मो.- 9425242182, 7746042182

हमारे बारे में

हिंदी प्रिंट मीडिया के साथ शुरू हुआ दक्षिणापथ समाचार पत्र का सफर आप सुधि पाठकों की मांग पर वेब पोर्टल तक पहुंच गया है। प्रेम व भरोसे का यह सफर इसी तरह नया मुकाम गढ़ता रहे, इसी उम्मीद में दक्षिणापथ सदा आपके संग है।

सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।

logo.webp

स्वामी / संपादक- पवन देवांगन

- बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)

ई - मेल : dakshinapath@gmail.com

मो.- 9425242182, 7746042182

NEWS LETTER
Social Media

Copyright 2024-25 Dakshinapath - All Rights Reserved

Powered By Global Infotech.