होम / बड़ी ख़बरें / फुगड़ी छत्तीसगढ़ के लाेक तिहार हरेली की पहचान: भुपेश बघेल
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दुर्ग / डुंडेरा। छत्तीसगढ़ के लाेक तिहार की मिटती पहचान को सहेजने और संवारने के प्रति लगाव रखने का संदेश देते हुए डुंडेरा में ग्रामवासियों के सहयोग से हरेली महोत्सव का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मुख्य अतिथि एवं पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू बतौर अध्यक्ष शामिल हुए। ग्रामवासियों के द्वारा दोनों अतिथि का अनोखा स्वागत देखने को मिला। गांव के मिनी माता चौक से सजी हुई बैलगाड़ी में बिठाकर उन्हें कार्यक्रम स्थल तक लाया गया। यह बड़ा रोचक ही दृश्य देखने को मिला। भूपेश बघेल बैलगाड़ी को खुद हांकते हुए नज़र आए। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद जनता ने आत्मीयता और बड़े ही जोश के साथ उनका स्वागत किया। अपनी भावनाओं को प्रकट करते हुए पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने लोगों को हरेली त्योहार का महत्व बताते हुए कहा, हरेली छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्यौहार है जिसमें किसानी में उपयोग होने वाले औजारों की पूजा होती है। चिला रोटी का भोग चढ़ाया जाता है। हरेली तिहार में खेले जाने वाले खेल पर उन्होंने चुटकी लेते हुए उपस्थित जनसमूह से पूछा कि यहां कितने लोग हैं जिन्हें गेड़ी चढ़ना आता है। यहां एक मेरी नजर में है जिन्हें मैं जानता हूं, कहते हुए उन्होंने भूपेश बघेल की ओर इशारा किया। हमारी सरकार ने छत्तीसगढ़ की पहचान त्योहारों और संस्कृति को सहेजने के लिए सशक्त भूमिका निभाई कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा हम सबको मिलकर बस हमें अपनी परम्परा और संस्कृति को संजोकर रखना है। भूपेश बघेल ने हरेली का महत्व बताते हुए कहा कि पहले महिलाएं हरेली के दिन एक खेल खेला करती थीं फुगड़ी। फुगड़ी और गेड़ी छत्तीसगढ़ का पहला त्योहार हरेली का पहचान है, ये खेल छत्तीसगढ़ के अलावा दुनिया में कहीं देखने को नहीं मिलेगा। हरेली तिहार की पहचान इस खेल से दूर होती आज की पीढ़ी को इसे कीसहेज कर रखने की जरूरत है।छत्तीसगढ़ के लाेक तिहार व उनसे जुड़ी संस्कृति को बचाने में हम छत्तीसगढ़ वासियों के हर पीढ़ी की भूमिका का होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के त्योहारों की महत्ता, संस्कृति और आयोजनों में वर्तमान सरकार की भूमिका जैसी होनी चाहिए वैसी दिखाई नहीं देती इतर अन्य खेलों के। पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर ने भी हरेली त्योहार को लेकर अपना विचार व्यक्त किया।डुंडेरा में आयोजित हरेली महोत्सव में अतिथियों केलाेक त्योहारों पर भाव प्रिय विचारों ने संस्कृति और परम्परा के प्रति लगाव के साथ नई पीढ़ी को सजग रहने का संदेश दे गया। इस हरेली महोत्सव में डुंडेरा का सारा जनसमूह छत्तीसगढ़ी लोकगीतों से सजे सांस्कृतिक प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध नजर आया।
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