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-जय आनंद मधुकर रतन भवन में 50 परीक्षार्थियों ने दी परीक्षा, देशभर में एक साथ आयोजित हुई परीक्षा

दुर्ग। जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब, दुर्ग में आज राष्ट्र संत, मानव मिलन के संस्थापक मणिभद्र मुनि जी महाराज एवं साध्वी श्री लक्ष्मी जी म.सा. के पावन सानिध्य में श्रमणसंघीय जैन धार्मिक परीक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित ‘जैन संस्कार आरोहण पाठ्यक्रम’ की धार्मिक परीक्षा संपन्न हुई। परीक्षा में दुर्ग केंद्र पर लगभग 80 परीक्षार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपने धार्मिक ज्ञान और संस्कारों को समृद्ध करने का संकल्प लिया।
श्रमणसंघीय जैन धार्मिक परीक्षा बोर्ड द्वारा यह परीक्षा 9 अगस्त, रविवार को दोपहर 1:30 से 4:30 बजे तक देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर एक साथ आयोजित की गई। छत्तीसगढ़ सहित भारत के अनेक क्षेत्रों में परीक्षार्थियों ने इस परीक्षा में भाग लिया। विशेष बात यह रही कि अनेक प्रतियोगी पूरे वर्ष नियमित अध्ययन एवं तैयारी करते रहे और परीक्षा के माध्यम से अपने धार्मिक ज्ञान का मूल्यांकन किया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ धार्मिक परीक्षा बोर्ड के अध्यक्ष दिनेश बाफना, भारती श्रीश्रीमाल एवं हरीश श्रीश्रीमाल ने परीक्षार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि धार्मिक परीक्षा केवल अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, स्वाध्याय और सद्शिक्षा को जीवन में उतारने का अवसर है। उन्होंने सभी श्रावक-श्राविकाओं एवं विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे प्रत्येक वर्ष इस परीक्षा में भाग लेकर अपने धार्मिक ज्ञान में निरंतर अभिवृद्धि करें और नई पीढ़ी को भी धर्म एवं संस्कारों से जोड़ें।
परीक्षा के आयोजन का उद्देश्य बताते हुए कहा गया कि “संस्कार, स्वाध्याय और सद्शिक्षा” को ध्येय बनाकर ज्ञानवृद्धि के लिए इस पाठ्यक्रम को परीक्षा का स्वरूप दिया गया है, ताकि परीक्षार्थी निरंतर अध्ययनशील, जागरूक एवं प्रगतिशील बने रहें। धार्मिक ज्ञान का अध्ययन व्यक्ति के जीवन में सद्विचार, सदाचार और आत्मचिंतन की भावना को मजबूत करता है।
इस धार्मिक परीक्षा के आयोजन के पीछे सत्प्रेरिका एवं मार्गदर्शिका परम विदुषी महासती डॉ. हेमप्रभा जी म.सा. का मंगल आशीर्वाद एवं प्रेरणा रही, जिसके प्रति आयोजकों एवं परीक्षार्थियों ने कृतज्ञता व्यक्त की।
दुर्ग के जय आनंद मधुकर रतन भवन में परीक्षा को व्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराने में कविता रतनबोहरा, श्रीमती मंजु सुराणा ऋषिका गोलक्षा का विशेष सहयोग रहा। सभी परीक्षार्थियों ने शांतिपूर्ण वातावरण में परीक्षा देकर धार्मिक अध्ययन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।
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