होम / बड़ी ख़बरें / ईज आफ डूइंग बिजनेस विधेयक छत्तीसगढ़ के 15 लाख एमएसएमई उद्योगों के लिए वरदान की तरह
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-साय सरकार का हर फैसला प्रदेश में कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने वाला
दक्षिणापथ। वाकया फ्रांस का है लुई 14 सबसे शक्तिशाली राजा थे और उनके प्रधानमंत्री थे कोल्बर्ट, व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने आया, कोल्बर्ट ने उनसे पूछा कि हम आपके लिए क्या कर सकते हैं। व्यापारियों ने कहा- व्यापार में न्यूनतम हस्तक्षेप।
हमारे देश में भी लंबे समय तक लायसेंस राज की वजह से प्रगति प्रभावित रही। यद्यपि हमारे देश ने उदारीकरण को अपनाया लेकिन इसके अवशेष अब भी कायम थे और कारोबार इसकी वजह से नुकसान उठा रहा था। छत्तीसगढ़ में भी एमएसएमई इंडस्ट्री को इसकी वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। बार-बार इंस्पेक्शन हो रहे थे, रिपोर्ट जमा करनी पड़ती थी, एक बड़ा सरकारी अमला भी इस गैर जरूरी औपचारिकता में लगा रहता था।
विष्णु देव साय की सरकार ने ईज आफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के माध्यम से इस गैर जरूरी औपचारिकता को समाप्त कर दिया। कम जोखिम वाले उद्योगों के लिए स्वप्रमाणन से ही अब काम हो सकता है और मध्यम जोखिम वाले उद्योगों के लिए थर्ड पार्टी प्रमाणन की सुविधा दी गई है। अधिक जोखिम वाले उद्योगों के लिए पहले की तरह ही इंस्पेक्शन होते रहेंगे। यह एमएसएमई उद्योगों के लिए वरदान की तरह है।
यह विधेयक इस सरल सोच पर आधारित है कि नियम के अनुसार काम करने वाले उद्योगों को अनावश्यक मंजूरियों, बार-बार लाइसेंस के नवीनीकरण और एक ही काम के लिए बार-बार अनुमति लेने की प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।
ईज आफ डूइंग बिजनेस अधिनियम में यह सुनिश्चित किया गया है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत निर्धारित समयसीमा में प्रमाणपत्र जारी किये जाएं। ऐसा नहीं हुआ तो स्वीकृति स्वतः प्राप्त मानी जाएगी। तीन दिन से अधिक की किसी भी देरी का मामला सीधे कार्यपालिक परिषद को भेजे जाने का प्रावधान भी रखा गया है।
राज्य में 15 लाख से अधिक एमएसएमई हैं। यह उद्यम लाखों लोगों को रोजगार देते हैं लेकिन हर बार लायसेंस की बाध्यताओं की वजह से इन्हें कार्यसंचालन में दिक्कतें आती थीं। अब यह दिक्कत दूर हो गई है। प्रदेश में नई औद्योगिक नीति के चलते 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक निवेश प्रस्ताव भी आये हैं जाहिर है कि इनके निवेश में तब्दील होने के लिए ईज आफ डूइंग बिजनेस विधेयक से सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ है।
यह हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सोच के अनुरूप है जो डिरेगुलेशन की बात करती है। प्रधानमंत्री जी ने ईज आफ डूइंग को हर क्षेत्र में कार्यान्वित किया है। ईज आफ डूइंग बिजनेस की तरह ही हमारी सरकार ने जनविश्वास अधिनियम भी पारित किया, इसके माध्यम से हमने उन दंडात्मक प्रावधानों को जुर्माने में तब्दील किया जो मामूली तकनीकी त्रुटियों के चलते लगाये जाते थे।
ईज आफ डूइंग बिजनेस का असर शीघ्र ही नजर आने लगेगा क्योंकि इसकी वजह से लायसेंस राज पनपता था, भ्रष्टाचार की शुरूआत होती थी, छोटे उद्यमियों के लिए इससे उबरना काफी कठिन होता था। ईज आफ डूइंग बिजनेस अधिनियम उस सोच को भी दर्शाता है जो पारदर्शिता का न केवल दावा करती है अपितु ऐसे निर्णय भी लेती है जिससे पारदर्शिता जमीन में नजर आती है।
कारोबारी जगत में जिस तरह के फैसले लिये जा रहे हैं और जिस तरह से नई औद्योगिक नीति के माध्यम से शासन ने उद्यमियों के लिए रेडकारपेट बिछाया है उससे निश्चित ही छत्तीसगढ़ का कारोबारी परिदृश्य बेहतर नजर आता है।
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