छत्तीसगढ़

दुर्ग क्षेत्र में स्मार्ट मीटर की शत-प्रतिशत सटीकता प्रमाणित

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-दुर्ग, बालोद, बेमेतरा जिले के 06 लाख 90 हजार से अधिक घरों में स्मार्ट मीटर स्थापित
दुर्ग/बालोद/बेमेतरा।
छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) दुर्ग क्षेत्र ने स्पष्ट किया है कि स्थापित किए गए स्मार्ट मीटर पूरी तरह से सटीक और त्रुटिहीन हैं। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मीटर की कार्यक्षमता और बिलिंग को लेकर दुर्ग एवं बेमेतरा जिले के 21 उपभोक्ताओं द्वारा की गई शिकायतों के बाद उन सभी मीटरों की गहन जांच मीटर लैब में कराई गई। जांच में यह पुष्टि हुई है कि मीटरों में किसी भी प्रकार की कोई तकनीकी खराबी या त्रुटि नहीं है, जो स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली की पारदर्शिता को प्रमाणित करती है।
उल्लेखनीय है कि दुर्ग, बालोद एवं बेमेतरा जिले के लगभग 09 लाख 80 उपभोक्ताओं में से कुल 06 लाख 90 हजार से अधिक उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि विद्युत रीजन दुर्ग के तीनों जिलों दुर्ग, बालोद एवं बेमेतरा के लगभग 82 प्रतिशत लोगों के घरों में आधुनिक स्मार्ट बिजली मीटर लग चुके हैं, जिससे वे नई व्यवस्था का सीधा लाभ उठाना शुरू कर चुके हैं। अब उपभोक्ता हर आधे घंटे में कितनी यूनिट बिजली की खपत हुई उसका रिकार्ड देख सकेंगे, जिससे विद्युत का किफायत से उपयोग किया जा सकेगा। स्मार्ट मीटर में पोस्टपेड एवं प्रीपेड की सुविधा है जिसमें प्रीपेड की सुविधा लेने पर हर साल जमा की जाने वाली सुरक्षा निधि से उपभोक्ताओं को मुक्ति मिल जाएगी। बैंक अकाउंट की तरह अब उपभोक्ता के फोन पर बिजली का पूरा हिसाब मौजूद रहेगा।
ज्ञात हो कि विद्युत रीजन दुर्ग के अंतर्गत विभागीय संभाग भिलाई शहर पश्चिम में 77487, भिलाई पूर्व संभाग में 56648, दुर्ग शहर संभाग में 70018, बालोद संभाग में 133988, दुर्ग संभाग में 100782, बेमेतरा संभाग में 66418, साजा संभाग में 62417, अहिवारा संभाग में 61817 एवं पाटन संभाग में 60452 निम्नदाब उपभोक्ताओं के घर स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं।
सीएसपीडीसीएल दुर्ग क्षेत्र के कार्यपालक निदेशक शिरीष सेलट ने कहा कि स्मार्ट मीटर की प्रमुख खूबी इसकी रीयल टाइम डेटा मॉनिटरिंग है, जो उपभोक्ताओं को मोर बिजली एप के माध्यम से प्रतिदिन की खपत ट्रैक करने की सुविधा देती है। इसके माध्यम से उपभोकता यह देख सकते हैं कि वे किस समय सबसे अधिक बिजली खर्च कर रहे हैं, जिससे उन्हें अपनी खपत कम करने और बिजली बिल बचत करने में मदद मिलती है। स्मार्ट मीटर में अब मानवीय त्रुटियों की संभावना शून्य हो गई है। कार्यपालक निदेशक ने कहा कि स्मार्ट मीटर का मुख्य उद्देश्य बिलिंग को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है। विभाग यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि किसी भी उपभोक्ता को गलत बिल का भुगतान न करना पड़े। उन्होंने कहा कि विभाग उपभोक्ताओं की शिकायतों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है, जिन उपभोक्ताओं को बिल राशि या रीडिंग को लेकर कोई संदेह है, वे संबंधित बिजली कार्यालय में अपना लिखित आवेदन दे सकते हैं। शिकायत प्राप्त होने पर विभाग द्वारा मीटर की कार्यक्षमता, रीडिंग और बिलिंग प्रक्रिया की गहन जांच की जाती है। यदि जांच मंे कोई तकनीकी त्रुटि पाई जाती है, तो तत्काल प्रभाव से बिल में संशोधन कर उसे दुरुस्त किया जाता है।
श्री सेलट ने बताया कि विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा जारी विद्युत(उपभोक्ताओं के अधिकार) नियमन 2020, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के द्वारा जारी मीटरिंग कोड एवं छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा बनाये गये नियमों के पालन में प्रदेश के सभी निम्नदाब उपभोक्ताओं के यहां पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटरों से बदलना अनिवार्य है। यह कार्य भारत सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त निर्देशों पर आरडीएसएस योजना के अंतर्गत किया जा रहा है।

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