-दुर्ग जिले की 102 ग्राम पंचायतों में 112 नवा तरिया एवं तालाब गहरीकरण कार्य स्वीकृत
दुर्ग। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा प्रारंभ किए गए “मोर गांव मोर पानी” महाभियान के अंतर्गत दुर्ग जिले में जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर नवा तरिया एवं तालाब गहरीकरण कार्य संचालित किए जा रहे हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत जनपद पंचायत धमधा, दुर्ग एवं पाटन की कुल 102 ग्राम पंचायतों में 112 कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई है।
कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देशन में संचालित इन निर्माण कार्यों को आगामी 15 जून तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्राम पंचायतों के सरपंच, उपसरपंच एवं पंचों के नेतृत्व में पंजीकृत श्रमिक पूरी सक्रियता के साथ निर्माण कार्यों में जुटे हुए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं तथा श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर कार्य उपलब्ध हो रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि नवा तरिया एवं तालाब गहरीकरण कार्यों का चयन ग्रामसभा की सहमति से किया गया है। भूमिपूजन के बाद से ही निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है और बारिश से पहले इन्हें पूरा करने के लिए ग्रामीण एकजुट होकर कार्य कर रहे हैं। इस परियोजना के माध्यम से प्रत्येक पात्र अकुशल श्रमिक परिवार को मांग के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।
मनरेगा के तहत जिले की 102 ग्राम पंचायतों में 112 नवा तरिया एवं तालाब गहरीकरण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें जनपद पंचायत धमधा की 40 ग्राम पंचायतें, जनपद पंचायत दुर्ग की 49 ग्राम पंचायतें तथा जनपद पंचायत पाटन की 13 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। स्वीकृत कार्यों के अंतर्गत तालाबों का गहरीकरण, नवा तरिया निर्माण एवं जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न संरचनात्मक कार्य किए जा रहे हैं। इन निर्माण कार्यों से बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध हो रहा है। वहीं वर्षा जल के अधिकतम संचयन से भू-जल स्तर में सुधार तथा कृषि एवं मत्स्य पालन गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
जनपद पंचायत धमधा की अछोली, अगार, अरसी, बरहापुर, बसनी, बिरझापुर, बिरोदा, बोरी, देवरी सहित 40 ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायत दुर्ग की अण्डा, अंजोरा, बोरई, चांगोरी, धनोरा, पुरई, थनौद सहित 49 ग्राम पंचायतों तथा जनपद पंचायत पाटन की करेला, असोगा, गब्दी, गाड़ाडीह, गुढ़ियारी, कानाकोट, करसा, केसरा, रवेली, रेंगाकठेरा, सिकोला, तर्रा एवं तेलीगुण्डरा सहित 13 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत तालाब गहरीकरण सह नवा तरिया निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों से जल संरक्षण के साथ ग्रामीणों को व्यापक स्तर पर रोजगार उपलब्ध हो रहा है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि “मोर गांव मोर पानी” महाभियान के अंतर्गत स्वीकृत नवा तरिया एवं तालाब गहरीकरण कार्य जिले में जल संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इन तालाबों के निर्माण पूर्ण होने के बाद प्रत्येक संरचना में 10 हजार घनमीटर से अधिक जल भंडारण क्षमता विकसित होगी। इससे वर्षा जल का बेहतर संचयन होने के साथ भू-जल स्तर में भी सुधार आएगा। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य पूर्ण होने के पश्चात तालाबों का संचालन स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा जाएगा, जिससे महिलाओं को आजीविका के नए अवसर प्राप्त होंगे तथा उनकी आर्थिक भागीदारी और सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा। प्रत्येक तालाब में प्रतिवर्ष लगभग 13 से 15 क्विंटल मत्स्य उत्पादन की संभावना है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में अतिरिक्त वृद्धि होगी।
उन्होंने कहा कि “मोर गांव मोर पानी” महाभियान के तहत निर्मित हो रहे नवा तरिया और गहरीकृत तालाब न केवल जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, बल्कि रोजगार सृजन, मत्स्य पालन और महिला सशक्तिकरण के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेंगे। यह अभियान जल सुरक्षा, सामुदायिक सहभागिता और ग्रामीण समृद्धि का सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है।
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