-भारत सेवा पुरस्कार 2026 से सम्मानित हुए आचार्य डॉ. अजय आर्य
रायपुर। शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, जनसेवा, चरित्र निर्माण तथा वैदिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सुप्रसिद्ध वैदिक चिंतक एवं समाजसेवी आचार्य डॉ. अजय आर्य को "भारत सेवा पुरस्कार 2026" से सम्मानित किया गया। यह सम्मान जीव्रान फाउंडेशन द्वारा प्रदान किया गया।जीव्रान फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी सामाजिक संस्था है, जो शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक जागरूकता और मानवीय सेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। संस्था द्वारा समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित कर उनके कार्यों को प्रोत्साहित किया जाता है।
सम्मान प्राप्त करने के पश्चात अपने उद्बोधन में आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि सेवा किसी व्यक्ति पर उपकार नहीं, बल्कि अपने भीतर की संवेदना को कर्म में परिणत करने का नाम है। उन्होंने कहा, "सेवा वह है जिसमें प्रतिफल की अपेक्षा नहीं होती। किसी निराश व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लौट आए, किसी प्यासे को जल मिल जाए, किसी जरूरतमंद को सहारा मिल जाए- वही सेवा की सच्ची सफलता है।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज समाज को केवल सफल व्यक्तियों की नहीं, बल्कि संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिकों की आवश्यकता है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "आजकल लोग मोबाइल की बैटरी खत्म होने पर तुरंत चार्जर खोज लेते हैं, लेकिन किसी व्यक्ति का उत्साह और आत्मविश्वास खत्म हो जाए तो उसे चार्ज करने बहुत कम लोग सामने आते हैं। समाज सेवा वही चार्जर है, जो टूटते हुए मनुष्य के जीवन में नई ऊर्जा भर देती है।"
आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि सेवा की शुरुआत बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि बड़े हृदय से होती है। एक पौधा लगाना, उसकी रक्षा करना, किसी वृद्ध की पीड़ा सुनना, किसी विद्यार्थी का मार्गदर्शन करना, किसी जरूरतमंद की सहायता करना अथवा समाज में सकारात्मक विचारों का प्रसार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कोई बड़ा अभियान।
उल्लेखनीय है कि आचार्य डॉ. अजय आर्य पिछले कई वर्षों से पर्यावरण संरक्षण और जनसेवा के विविध अभियानों से जुड़े हुए हैं। वे नियमित रूप से पौधारोपण, पौधा वितरण तथा वृक्ष संरक्षण के कार्यक्रमों का संचालन करते हैं। उनके प्रयासों से बड़ी संख्या में लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा मिली है। इसके अतिरिक्त वे रक्तदान, जलदान, वस्त्रदान, नैतिक शिक्षा, युवा मार्गदर्शन तथा सामाजिक जागरण के कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। वे समय-समय पर वृद्धाश्रमों, सेवा संस्थानों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से जरूरतमंदों की सहायता और सेवा कार्यों में भी सहभागी बनते हैं।
वर्तमान में भीषण गर्मी के दौरान उनके नेतृत्व में आर्य समाज द्वारा जलदान अभियान संचालित किया जा रहा है। पिछले एक माह से रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थलों पर यात्रियों, श्रमिकों तथा जरूरतमंद लोगों को ठंडा जल, लस्सी, छाछ, बिस्किट और नमकीन वितरित किए जा रहे हैं। उनका मानना है कि सेवा का वास्तविक उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और आत्मीयता का वातावरण निर्मित करना है।
अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा, "ऋषि परंपरा, गुरुकुल परंपरा और आर्य समाज ने मुझे जो संस्कार, विचार और जीवन-दृष्टि प्रदान की है, मैं आजीवन उसका ऋणी रहूँगा। मेरे गुरुओं ने मुझे सिखाया है कि जीवन का वास्तविक मूल्य संग्रह में नहीं, बल्कि समर्पण में है। मैं सेवा के माध्यम से निरंतर यह प्रयास करता रहूँगा कि किसी व्यक्ति, परिवार अथवा समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकूँ। यदि ऐसा हो पाया तो वही मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान और पुरस्कार होगा।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने आचार्य डॉ. अजय आर्य के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। पर्यावरण संरक्षण, मानवीय सेवा, वैदिक संस्कारों और सामाजिक जागरण के क्षेत्र में उनके प्रयास अनुकरणीय हैं तथा युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।
इस अवसर पर श्वेता शर्मा, प्रवीण गुप्ता, प्रमिला सरपाल, डॉ. अनुपम मौर्य, कमलेश आर्य, शिपि आर्य, कौशल किशोर, मृत्युंजय शर्मा तथा जवाहरलाल सरपाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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