बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को दोषी ठहराया है। अदालत ने उन्हें हत्या और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
यह फैसला उस समय आया है जब इस मामले को लेकर वर्षों से कानूनी लड़ाई जारी थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के 2007 के फैसले को पलटते हुए कहा कि एक ही साक्ष्य के आधार पर कुछ आरोपियों को सजा देना और मुख्य आरोपी को बरी करना न्यायसंगत नहीं था।
अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यह फैसला राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि अमित जोगी, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र हैं। साथ ही वे जोगी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। फिलहाल इस फैसले के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया, विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट में संभावित अपील पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
2003 में हुई थी हत्या ..
4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा हुई थी। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया।
संपादक- पवन देवांगन
पता - बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)
ई - मेल : dakshinapath@gmail.com
मो.- 9425242182, 7746042182
हिंदी प्रिंट मीडिया के साथ शुरू हुआ दक्षिणापथ समाचार पत्र का सफर आप सुधि पाठकों की मांग पर वेब पोर्टल तक पहुंच गया है। प्रेम व भरोसे का यह सफर इसी तरह नया मुकाम गढ़ता रहे, इसी उम्मीद में दक्षिणापथ सदा आपके संग है।
सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।
Copyright 2024-25 Dakshinapath - All Rights Reserved
Powered By Global Infotech.