दुर्ग

दुर्ग में वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ, 71 लाख से अधिक प्रकरणों का हुआ निराकरण

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दुर्ग। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ सोमवार को जिला न्यायालय दुर्ग में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ Justice Ramesh Sinha, मुख्य न्यायाधीश, Chhattisgarh High Court तथा मुख्य संरक्षक, Chhattisgarh State Legal Services Authority द्वारा किया गया। इस अवसर पर Justice Naresh Kumar Chandravanshi की गरिमामयी उपस्थिति भी रही।
राज्यभर में आयोजित वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 71,94,079 प्रकरणों का निराकरण किया गया तथा 37,32,45,02,059 रुपये से अधिक की राशि का अवार्ड पारित किया गया। इन मामलों में आपराधिक शमनीय प्रकरण, दीवानी मामले, राजस्व विवाद, मोटर दुर्घटना दावा, पारिवारिक विवाद, यातायात चालान तथा मुकदमा पूर्व मामले शामिल रहे।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने जिला न्यायालय दुर्ग एवं जिला न्यायालय रायपुर में लोक अदालत की कार्यवाही का निरीक्षण करते हुए न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, बैंकिंग संस्थानों तथा विद्युत विभाग के अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में लंबित मामलों को कम करने और विवादों के प्रभावी समाधान के लिए सभी हितधारकों के बीच समन्वय और सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लोक अदालत के माध्यम से विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटारे की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ करने पर जोर दिया।
इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश ने लोक अदालत एवं मध्यस्थता जागरूकता के लिए तैयार विशेष थीम सांग का भी उद्घाटन किया, जिसे स्थानीय पंडवानी शैली में तैयार किया गया है, ताकि वैकल्पिक विवाद समाधान का संदेश आमजन तक सहज रूप से पहुंच सके।
कार्यक्रम के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में गठित खंडपीठों के अध्यक्ष Justice Sachin Singh Rajput और Justice Amitendra Kishore Prasad से भी चर्चा की गई। साथ ही राज्य के सभी जिलों के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के साथ भी लोक अदालत की कार्यवाहियों पर विस्तृत संवाद किया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान Bilaspur स्थित उच्च न्यायालय में एक पारिवारिक विवाद का सकारात्मक समाधान भी सामने आया। वैवाहिक मतभेद से जुड़े इस मामले में दोनों पक्षकारों ने आपसी सहमति से अपने मतभेद समाप्त करते हुए पुनः साथ रहने का निर्णय लिया। समझौते के अनुसार पति-पत्नी अपने बच्चों के साथ एक ही छत के नीचे रहेंगे और पति परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाएगा।
मुख्य न्यायाधीश ने इस सफल आयोजन के लिए Justice Sanjay K. Agrawal, Justice Parth Prateem Sahu, सभी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों, परिवार न्यायालयों के न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, पक्षकारों तथा अन्य संबंधित हितधारकों की सराहना करते हुए कहा कि लोक अदालत व्यवस्था जनता को शीघ्र, सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम बनती जा रही है।

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