दुर्ग। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शासकीय बाल संप्रेक्षण गृह, दुर्ग में महिलाओं के सशक्तिकरण एवं उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के आदेश के पालन में तथा माननीय मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा के प्रेरणादायी विचारों से प्रेरित होकर आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश, अधिवक्ता, महिला पुलिस कर्मी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
इस कार्यशाला का उद्देश्य महिला कर्मचारियों, महिला पुलिस, अधिवक्ताओं तथा मितानिनों के योगदान को रेखांकित करना तथा उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। साथ ही महिला सशक्तिकरण के प्रति समाज में जागरूकता को बढ़ावा देना भी इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य रहा।
कार्यक्रम के दौरान द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी, दुर्ग ने अपने संबोधन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए महिलाओं के अधिकारों एवं सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विधिक प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कानून महिलाओं को घरेलू हिंसा से संरक्षण प्रदान करने तथा उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार सुनिश्चित करता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी.), दुर्ग ने अपने संदेश में कहा कि महिलाओं का सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त की कुछ पंक्तियों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के अधिकार और कर्तव्यों को समझाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सक्रिय सहभागिता से समाज और न्याय व्यवस्था अधिक संवेदनशील एवं सशक्त बनती है। साथ ही उन्होंने महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर दुर्ग अधिवक्ता संघ की महिला प्रतिनिधि ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के सम्मान, अधिकारों और समान अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है और अधिवक्ता समुदाय महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम के अंत में सभी न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने महिला सम्मान और समानता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अवसर पर शासकीय बाल संप्रेक्षण गृह के सदस्यों द्वारा उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को गुलाब का फूल भेंट कर सम्मानित किया गया।
साथ ही महिला दिवस की थीम "Give to Gain" को प्रदर्शित करने के लिए एक सेल्फी जोन भी तैयार किया गया इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पीएलवी, दुर्ग जिले की मितानिनें, अधिवक्ता तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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