दुर्ग-भिलाई

किसी भी काम को मन व एकाग्रता से करना ही साधना कहलाता है: गजेंद्र यादव 

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-पांच दिवसीय विशेष साधना शिविर का शुभारंभ परमहंस प्रज्ञानंद जी महाराज व शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने किया 

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दुर्ग। प्रज्ञानालय क्रिया योग आश्रम पद्मनाभपुर दुर्ग के द्वारा क्रियायोगियो के लिए पांच दिवसीय विशेष साधना शिविर का आयोजिन 20 से 25 फरवरी तक चोपड़ा पेलेस आदर्श नगर में आहूत है। जिसका शुभारंभ आज 21 फरवरी को सुबह क्रियायोग के विश्वगुरु परमहंस प्रज्ञानंद जी महाराज व प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा एक भव्य गरिमामयी कार्यक्रम में  दिप प्रज्वलित कर किया गया। उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव दिव्य अतिथि के रूप में गुरुदेव परमहंस प्रज्ञानांद जी महाराज व विशेष अतिथि के रूप में पार्षद लीलाधर पाल , संजय अग्रवाल , सविता पोषण साहू व आश्रम की संचालिका धरानंद गिरि उपस्थित थी। साथ ही बड़ी संख्या में क्रियायोगी भी शामिल थे।
इस दौरान कियायोगियो को सम्बोधित करते हुए मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि किसी भी काम को मन व एकाग्रता से करना ही साधना कहलाता है। क्रियायोग में सभी चक्रों का चक्र सोधन आवश्यक है। महावतार बाबा के सम्बंध में बताते हुए उन्होंने कहा कि महावतार बाबाजी महाराज अजर और अमर हैं। कभी वे निराकार होते हैं, तो कभी अपने शिष्यों के समक्ष किसी भी रूप में प्रकट होकर मानवता को सांसारिक बंधनों से मुक्त करते हैं। महामुनि, त्र्यंबक बाबा, शिव बाबा और बदुआ बाबा जैसे विभिन्न नामों से पूजित, बाबाजी महाराज का वर्णन किसी भी ऐतिहासिक या शास्त्रीय निश्चितता के साथ नहीं किया जा सकता। उनके कार्य दिव्य हैं, एक ऐसे रहस्य में लिपटे हुए हैं जिसका सटीक विवरण छिपा है। समय उनके जन्म, व्यक्तित्व और जीवन के बारे में तथ्यों को उजागर करने में विफल रहा है। वे आदि, महाकाल और अमर हैं, समय और स्थान की सीमाओं के बंधन में नहीं रहते। वे सभी संतों और ऋषियों में सर्वोच्च और अद्वितीय हैं। वे भ्रमित, शोकाकुल, भयभीत, हताश और संशयग्रस्त लोगों को नवजीवन का अनुभव प्रदान करने के लिए एक परम करुणामय, सुंदर, ज्योतिर्मय रूप धारण करते हैं और उन्हें ईश्वर-साक्षात्कार का मार्ग दिखाते हैं। 

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वहीं क्रियायोगीयो को सम्बोधित करते हुए गुरूदेव परमहंस प्रज्ञानद जी महाराज ने कहा कि क्रिया योग ध्यान तकनीकें, श्वास नियंत्रणव और शांति सिखाता है, प्रत्यक्ष और तात्कालिक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है, मन को शुद्ध और विकसित करने में मदद करता है, और इच्छा और अहंकार के बंधन को मिटाता है, शरीर को शक्ति और स्फूर्ति प्रदान करता है, गैर-सांप्रदायिक है और सिखाता है कि सभी क्रियाएँ पूजा हो सकती हैं, केवल एक अधिकृत और सशक्त गुरु के सीधे संपर्क से ही सिखाया जाता है, यह आत्म-साक्षात्कार प्राप्त गुरुओं की एक अटूट श्रृंखला के माध्यम से हमारे पास आया। 
उन्होंने कहा कि क्रियायोग एवं अन्य पारंपरिक यौगिक अभ्यासों में उसी तरह अंतर है, जिस तरह एक आधुनिक सुशिक्षित चिकित्सक के औषधि निर्धारण एवं एक ग्रामीण नीम हकीम के औषधि निर्धारण में है। अनेक पारंपरिक योग प्रविधियों में कठोर तपस्या एवं कष्टदायक प्रक्रियाओं से होकर गुजरना पड़ता है, जिसका क्रियायोग तकनीक में सर्वथा अभाव है। क्रियायोग की वैज्ञानिक तकनीक मेरे प्राधिकृत आचार्यों के द्वारा सिखाई जाती है। यह आध्यात्मिक अभ्यास जो लाहिड़ी महाशय द्वारा सिखाया जाता था, गृहस्थों के लिए अत्यन्त उपयुक्त है। क्रियायोग तकनीक में सिखाई जाने वाली सरल एवं आसान श्वास नियंत्रण तकनीक, खोई हुई संतुलित अवस्था को पुनः सीमित करती है एवं मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। किन्तु इसके अभ्यास हेतु आत्मोपलब्धि प्राप्त गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक है। इस प्रक्रिया में श्वास के द्वारा लिया गया शुद्ध प्राणवायु (ऑक्सीजन) शरीर के आंतरिक अवयवों को शुद्ध करता है, अंगों को क्रियाशील करता है एवं भूख में वृद्धि करता है। यह शरीर को शक्ति एवं यौवन तथा मन को स्मृति, धैर्य और प्रतिभा प्रदान करता है। यह शरीर मन बुद्धि एवं जीवन को एक साथ शुद्ध करता है। इस प्रक्रिया के लिए खान-पान संबंधी किसी प्रकार के परहेज की आवश्यकता नहीं होती। इस दौरान प्रमुख क्रियायोगियो में दिलीप देशमुख, ओम प्रकाश वर्मा, गजनन्द गौतम, बी बी कुशवाहा, कामत निर्मल, दयाराम सिन्हा, अजय नारायम, अवधेश विष्वकर्मा, प्रह्लाद त्रिवेदी, घनश्याम भरतद्वाज, अविनाश, आशीष, महेश आदि शामिल थे।

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