दुर्ग

लैंगिक संवेदनशीलता से सामाजिक समानता की ओरः मानव अधिकार पर आधारित राष्ट्रीय कार्यशाला

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दुर्ग। अपोलो महाविद्यालय, अंजोरा, दुर्ग द्वारा  04 फरवरी 2026 को समाज कल्याण विभाग, दुर्ग एवं अपोलो महाविद्यालय के साथ एम.ओ.यू. संस्थान मितवा संकल्प समिति सरोना, रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में "Awareness to Action: Gender Sensitization for Social Equity as Human Right" विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की शुरूवात मां सरस्वती की पूजा अर्चना एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यशाला में मुख्य अतिथि ए.पी. गौतम (डिप्टी डायरेक्टर) समाज कल्याण विभाग, दुर्ग, महाविद्यालय के संचालक संजय अग्रवाल, डॉ. मनीष जैन,  आशीष अग्रवाल एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सिद्धार्थ जैन तथा रिसोर्स पर्सन के रूप में सुश्री रवीना बरीहा (सदस्य, थर्ड जेंडर काउंसिल, भारत सरकार), विद्या राजपूत (सदस्य, जिला थर्ड जेंडर काउंसिल, रायपुर, छ.ग.),  पॉपी देवनाथ (प्रोजेक्ट मैनेजर, गरिमा गृह सरोना, छ.ग.) व महाविद्यालय के आई. क्यू.ए.सी. समन्वयक डॉ. राखी शर्मा, शिक्षकों एवं छात्राध्यापकों की उपस्थिति रहीं। कार्यशाला में संचालक संजय अग्रवाल ने सभी का स्वागत एवं अभिवादन किया तथा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सिद्धार्थ जैन ने कार्यशाला के उद्देश्य के बारे में बताया। तत्पश्चात् मुख्य अतिथि ए. पी. गौतम (डिप्टी डायरेक्टर) समाज कल्याण विभाग, दुर्ग ने कहा कि ये सब समाज से अलग नहीं बल्कि समाज का ही हिस्सा है। उन्होंने ये भी बताया कि इनके लिए समाजिक भवन निर्माण के लिए शासन की ओर से पुलगांव, दुर्ग में 3 हजार वर्गफीट जमीन की स्वीकृति दी है, शहरी एवं ग्रामीण विकास स्तर पर थर्डजेंडर के लिए टॉयलेट का निर्माण करवाये है। इस साल विभागीय पोर्टल पर 44 थर्डजेंडर पंजीकृत हुए है तथा इन्हें 105 सिलाई मशीन प्रदान की गयी है।

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प्रथम तकनीकी सत्र में कार्यशाला के रिसोर्स पर्सन पॉपी देवनाथ ने अपने जीवन के व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए "ट्रांसमेन (Trans-Men) जीवन की चुनौतियाँ एवं लैंगिक सर्जरी" विषय पर अपने विचार व्यक्त किये। इस सत्र में ट्रांसमेन के जीवन से जुड़ी व्यक्तिगत, सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर चर्चा की, लैंगिक सर्जरी से संबंधित प्रक्रियाओं, भ्रांतियों, वास्तविकताओं तथा मानसिक-शारीरिक सहयोग के महत्व को भी समझाया। उन्होंने कहा कि बच्चों के पालन पोषण में उन्हें बच्चा समझना महत्वपूर्ण है न कि बालक या बालिका।
द्वितीय तकनीकी सत्र में सुश्री विद्या राजपूत ने "ट्रांसजेंडर समुदाय की सामाजिक स्थिति" विषय पर अपने विचार साझा किये। इस सत्र में विद्या जी ने ट्रांसजेंडर समुदाय की सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक एवं पारिवारिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। समाज में व्याप्त भेदभाव, असमानता और रूढ़ धारणाओं को रेखांकित करते हुए यह बताया कि किस प्रकार संवेदनशील सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण से एक सम्मानजनक एवं समावेशी समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस साल 2025 में 13 कॉन्सेटेबल चयनित हुए तथा बताया कि जो समाज में थर्ड जेंडर है उन्हें गरिमा गृह, सरोना रायपुर में शामिल कर उनके आवास, शिक्षा, स्वास्थ, भोजन आदि की उत्तम व्यवस्था की जाती है। इन्हे आर्थिक रूप से ही नहीं वरन् मानसिक रूप से भी सशक्त किया जाता हैं।
तृतीय तकनीकी सत्र में सुश्री रवीना बरिहा ने थर्ड जेंडर के सुरक्षा अधिनियम पर चर्चा की। इस सत्र में ट्रांसजेंडर अधिकारों के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, अधिनियम के उद्देश्य, प्रमुख प्रावधानों एवं नियमावली की जानकारी दी, साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पहचान पत्र, शिकायत निवारण एवं कानूनी संरक्षण से जुड़े अधिकारों को भी बताया। उन्होंने कहा कि समाज में दो ही लिंग की चर्चा की जाती रहीं है, लेकिन प्राचीन काल में, वेद पुराणों में भी तृतीय लिंग का वर्णन मिलता है। प्रश्नोत्तर सत्र में छात्राध्यापकों द्वारा पुछे गये प्रश्नों का वक्ताओं ने सहज ढंग से उत्तर दिया। अंत में आई. क्यू.ए.सी समन्वयक डॉ. राखी शर्मा ने इस कार्यशाला में उपस्थित मुख्य अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकगणों एवं छात्राध्यापकों को धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यशाला के समाप्ति की घोषणा की।

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