दुर्ग। स्थानीय मोतीपारा स्थित डोनगांवकर बाड़ा में भागवत महिला समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस में चित्रकूट से पधारे सुप्रसिद्ध कथा वाचक श्री भरत जी महाराज ने ध्रुव चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणादायक प्रसंग श्रद्धालुओं को सुनाया।
कथा के दौरान भरत जी महाराज ने माता के आचरण एवं संतान के पालन-पोषण के महत्व पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि माता चाहे तो अपनी संतान को राम, कृष्ण, महावीर और गौतम बुद्ध जैसा महान बना सकती है और यदि चाहे तो वही संतान रावण और कंस जैसे अधर्मी मार्ग पर भी जा सकती है। उन्होंने बताया कि बालक के चरित्र निर्माण में माता का आचरण सर्वोपरि होता है।
ध्रुव जी की तपस्या का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि ध्रुव ने पूर्ण एकाग्रता एवं दृढ़ निश्चय के साथ भगवान की आराधना की, जिसके परिणामस्वरूप भगवान ने उन्हें शीघ्र दर्शन दिए। उन्होंने गीता के श्लोक “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” का उद्धरण देते हुए कहा कि जब कर्म में एकाग्रता होती है, तब सफलता निश्चित होती है। मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने पर है, फल तो प्रकृति और ईश्वर स्वयं प्रदान करते हैं, उसे कोई रोक नहीं सकता।
भक्ति की महिमा बताते हुए श्री भरत जी महाराज ने कहा कि सच्चा भक्त भगवान से केवल प्रेम और भक्ति ही मांगता है, सांसारिक वस्तुओं की कामना नहीं करता। आध्यात्मिक प्रेम और भक्ति से ही जीव का वास्तविक कल्याण संभव है।
कथा के समापन पर भागवत महिला समिति द्वारा आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। समिति ने समस्त दुर्गवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण करने की अपील की है। आयोजकों ने बताया कि आज प्रहलाद चरित्र के अंतर्गत भगवान नरसिंह अवतार की दिव्य एवं रोमांचक कथा श्रद्धालुओं को सुनाई जाएगी।
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