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संगोष्ठी में महिलाओं के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर दिया जोर

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-महिलाएं इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग कर आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनें : घनश्याम देवांगन 
भिलाई ।
इंडियन इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग (आईआईआईई) भिलाई चेप्टर के तत्वावधान में सियान सदन हाउसिंग बोर्ड भिलाई में महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को गति देने हेतु इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग की तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में आधार वक्तव्य देते हुए वाइस चेयरमैन घनश्याम कुमार देवांगन ने कहा कि इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग तकनीक का उपयोग केवल उद्योगों तक ही सीमित न होकर सभी वर्गों के, विशेषकर महिलाओं के कल्याण, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार एवं आत्मनिर्भरता के लिए एक सशक्त माध्यम सिद्ध हो सकती है। उन्होंने बताया कि एर्गोनॉमिक्स, कार्य सरलीकरण, समय एवं गति अध्ययन, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रक्रिया सुधार एवं डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकों के माध्यम से महिलाओं के कार्यस्थलों को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और उत्पादक बनाया जा सकता है। इससे न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, बल्कि उनकी आय एवं कार्य-क्षमता में भी वृद्धि होती है। उन्होंने स्व-सहायता समूहों, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प, सिलाई एवं खाद्य प्रसंस्करण आदि इकाइयों में इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग तकनीक के प्रयोग को विशेष रूप से उपयोगी बताया। साथ ही, महिला-केंद्रित सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु डेटा आधारित नीति निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि महिलाएं इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग कर आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बन सकती हैं। वे इस तकनीक का उपयोग अपनी बेहतरी के लिए करें। संगोष्ठी में डॉ कांति लाल विश्वकर्मा ने कहा कि इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग तकनीकें महिलाओं के कार्य-जीवन संतुलन, सार्वजनिक सुरक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। संगोष्ठी के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग तकनीक और मानवीय संवेदनशील दृष्टिकोण के समन्वय से महिला कल्याण को ठोस और स्थायी परिणामों में बदला जा सकता है।

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      हेल्पेज इंडिया के राज्य प्रमुख शुभांकर बिस्वास ने इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग तकनीक को उपयोगी एवं लाभदायक बताया। उन्होंने महिलाओं को स्व-सहायता समूह बनाकर आर्थिक स्वावलंबन के लिए प्रेरित किया। अजय सिंह ने स्व-सहायता समूह गठन करने की प्रक्रिया एवं उसके लाभ बताए। संगोष्ठी में महिलाओं ने इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग तकनीक, स्व-सहायता समूह गठन की प्रक्रिया आदि से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे, जिसका उचित समाधान परक उत्तर दिया गया। 
       आरंभ में हाउसिंग बोर्ड सियान सदन के अध्यक्ष डॉ. कांति लाल विश्वकर्मा एवं पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत किया। मंदा वासनकर, छाया विश्वकर्मा, ललिता श्रीवास, उमा घोरमोड़ एवं साथियों ने आकर्षक स्वागत गीत तथा दिनेश मिश्रा, मंगलूराम देवांगन, दिनेश गुप्ता ने भजन  प्रस्तुत किया।      
संगोष्ठी में आईआईआईई भिलाई चेप्टर के वाइस चेयरमैन घनश्याम देवांगन, सीनियर मेंबर डॉ. कांति लाल विश्वकर्मा, दिनेश कुमार गुप्ता, दिनेश प्रसाद मिश्रा, कृष्णराव गुजर, मंगलूराम देवांगन, एम.आर. निराला, छाया विश्वकर्मा, मंदा वासनकर, शैलजा वार्ष्णेय, शोभा गुजर आदि सहित सियान सदन हाउसिंग बोर्ड के सदस्य एवं महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे। उपस्थित महिलाओं ने संगोष्ठी को बहुत ही उपयोगी एवं लाभदायक बताया। संगोष्ठी के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने महिला सशक्तिकरण के लिए सतत प्रयास करने हेतु सामूहिक संकल्प लिया। संगोष्ठी के आयोजन में हेल्पेज इंडिया एवं वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति, हाउसिंग बोर्ड का सराहनीय योगदान रहा। संचालन कांति लाल विश्वकर्मा एवं आभार प्रदर्शन दिनेश प्रसाद मिश्रा ने किया।

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