दुर्ग। कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार दुर्ग जिले में प्रत्येक माह की 7 तारीख को चावल महोत्सव एवं रोजगार दिवस के साथ-साथ “आवास दिवस” का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड दुर्ग की ग्राम पंचायत बासीन में आवास दिवस एवं रोजगार दिवस का आयोजन किया गया।
ग्राम चौपाल में आयोजित इस कार्यक्रम में बजरंग कुमार दुबे, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग, श्रीमती सरस्वती बंजरे, अध्यक्ष जिला पंचायत एवं पवन शर्मा, उपाध्यक्ष जिला पंचायत की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित किया गया तथा पंचायत से संबंधित योजनाओं की जानकारी क्यूआर कोड स्कैन के माध्यम से ली गई।

आवास दिवस के अवसर पर ग्रामीणों को महात्मा गांधी नरेगा एवं प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) की विस्तृत जानकारी दी गई। योजनाओं से संबंधित विवरण क्यूआर कोड के माध्यम से उपलब्ध कराया गया, जिससे ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी सरलता से प्राप्त हो सके। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के टोल-फ्री नंबर 1800-233-1290 का भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया।
कार्यक्रम के दौरान रोजगार दिवस अंतर्गत आजीविका डबरी निर्माण, आजीविका संवर्धन तथा विभिन्न योजनाओं के अभिसरण पर चर्चा की गई।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि आवास दिवस का मुख्य उद्देश्य जनजागरूकता, समस्याओं का त्वरित निराकरण एवं योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन है। उन्होंने बताया कि PMAY-G के हितग्राहियों को 90 दिवस की अकुशल श्रमिक मजदूरी का लाभ देते हुए आवास निर्माण समय-सीमा में पूर्ण कराने, निर्माण सामग्री संबंधी समस्याओं के समाधान, सामग्री बैंक की स्थापना तथा पीएम जनमन योजना के हितग्राहियों को प्राथमिकता देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस अवसर पर शासन की महत्वाकांक्षी योजना विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण (VB-GRAM-G) की जानकारी भी दी गई।

अधिकारियों ने बताया कि यह योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का आधुनिक स्वरूप है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करना है।
ग्रामीणों को अवगत कराया गया कि अब रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं तथा मजदूरी का भुगतान एक सप्ताह के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। कार्य की मांग के बावजूद रोजगार नहीं मिलने पर भत्ते का प्रावधान भी किया गया है। इसके अतिरिक्त धान की खेती के पीक सीजन में 60 दिनों तक सरकारी कार्य बंद रखने का प्रावधान किया गया है, जिससे खेती-किसानी प्रभावित न हो।
ग्रामीणों ने योजनाओं को अत्यंत लाभकारी बताते हुए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि गांव में ही रोजगार उपलब्ध होने, समय पर भुगतान तथा बुनियादी ढांचे के विकास से पलायन रुकेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी। ग्राम पंचायत बासीन में ग्रामीणों का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाएं धरातल पर प्रभावी रूप से क्रियान्वित हो रही हैं।
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