होम / बड़ी ख़बरें / रुक्मणी विवाह : भक्त की करुण पुकार और प्रभु कृपा का दिव्य उत्सव- देवी गरिमा
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दुर्ग। सनातन धर्म की अमूल्य धरोहर श्रीमद्भागवत में वर्णित भगवान श्रीकृष्ण एवं देवी रुक्मणी का पावन विवाह केवल एक ऐतिहासिक या पौराणिक घटना नहीं, बल्कि यह भक्त और भगवान के बीच अटूट विश्वास, पूर्ण समर्पण तथा धर्म की विजय का शाश्वत संदेश है। यह प्रसंग दर्शाता है कि जब भक्त निष्कपट भाव से प्रभु को पुकारता है, तब स्वयं भगवान धर्म की रक्षा हेतु सभी बंधनों को तोड़कर भक्त के मान-सम्मान की रक्षा करते हैं।
रुक्मणी जी का साहस, श्रद्धा और आत्मसमर्पण नारी गरिमा, विश्वास और आध्यात्मिक दृढ़ता का अनुपम उदाहरण है। वहीं भगवान श्रीकृष्ण का उनका उद्धार कर धर्मसम्मत विवाह करना प्रेम, करुणा और न्याय का सर्वोच्च आदर्श प्रस्तुत करता है। यह विवाह केवल दो आत्माओं का मिलन नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के दिव्य संबंध का प्रतीक है।
इसी पावन भाव को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने के उद्देश्य से नगर में रुक्मणी विवाह महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव के अंतर्गत श्रीकृष्ण–रुक्मणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण एवं जीवंत मंचन, मधुर भजन-कीर्तन, कथा एवं वैदिक विधियों के साथ विवाह अनुष्ठान संपन्न होगा, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भक्तिरस में सराबोर हो उठेंगे।
आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रहकर समाज में नैतिक मूल्यों, नारी सम्मान, पारिवारिक संस्कारों तथा धर्म के प्रति आस्था को सुदृढ़ करना है। यह महोत्सव जनमानस को यह स्मरण कराता है कि अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः विजय सत्य, प्रेम और धर्म की ही होती है।
आयोजन समिति द्वारा समस्त धर्मप्रेमी नागरिकों, श्रद्धालुजनों एवं सांस्कृतिक प्रेमियों से कथा में सपरिवार पधारकर इस अलौकिक एवं पुण्यप्रद आयोजन के साक्षी बनने तथा प्रभु श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने का विनम्र अनुरोध किया।
संपादक- पवन देवांगन
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