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“वाह जिंदगी वाह” शिविर के तीसरे दिन आध्यात्मिक सशक्तिकरण पर बोले प्रो. ई.वी. गिरिश

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दुर्ग। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के बघेरा स्थित “आनंद सरोवर” दुर्ग के कमला दीदी सभागार में आयोजित “वाह जिंदगी वाह” शिविर के तीसरे दिन के सत्र में मुंबई से आए अंतरराष्ट्रीय प्रख्यात मोटिवेशनल स्पीकर प्रोफेसर ई.वी. गिरिश ने जीवन, तनाव और आध्यात्मिकता पर सारगर्भित विचार रखे।
प्रोफेसर गिरिश ने कहा कि जीवन अनिश्चितताओं का खेल है, लेकिन हम उसे कैसे लेते हैं यह पूरी तरह हम पर निर्भर करता है। आध्यात्मिकता का वास्तविक अर्थ अपने मन को शांत और संतुलित रखना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आध्यात्मिक व्यक्ति अंदर से सरल होता है और सत्य के आधार पर जीवन जीता है।
तनाव के विषय में उन्होंने कहा कि आम धारणा यह है कि तनाव बाहरी परिस्थितियों या व्यक्तियों के कारण होता है, जबकि वास्तविकता यह है कि परिस्थितियां तो केवल तथ्य होती हैं। तनाव या तनावमुक्त जीवन हमारी प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। यदि व्यक्ति स्वयं को परिस्थितियों से अधिक सक्षम और शक्तिशाली बना ले, तो परिस्थितियां उस पर हावी नहीं हो सकतीं।

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उन्होंने यह भी कहा कि मेरे जीवन की सफलता का कारण भी मैं स्वयं हूं और दुःख का कारण भी मैं ही हूं। स्वयं को सशक्त और शक्तिशाली बनाने के लिए उन्होंने अनेक व्यावहारिक सुझाव दिए। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पांच महीने का बच्चा तैरना सीख सकता है, लेकिन हम पंद्रह साल के बच्चे को पानी से डराते हैं। यह हमारी गलत धारणाओं का परिणाम है।
कर्म सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए प्रो. गिरिश ने कहा कि दो व्यक्तियों के बीच कर्मों का “अकाउंट ट्रांसफर” संभव नहीं है। जैसे कर्म होंगे, वैसा ही सुख या दुःख जीवन में प्राप्त होगा। इस सत्य को गहराई से समझ लेने पर परिवार और समाज में रहते हुए भी मानसिक स्थिति स्थिर रह सकती है। इसके लिए प्रतिदिन स्वयं को सीखते रहना आवश्यक है, यही आध्यात्मिकता सिखाती है।
उन्होंने कहा कि स्नेह, मुस्कुराहट, शक्ति और निडरता जैसे दिव्य गुणों के कारण ही देवियां पूजनीय बनती हैं। इन गुणों को जीवन में धारण कर व्यक्ति स्वयं को भी पूजनीय बना सकता है, जिसे सेल्फ रिस्पेक्ट कहा जाता है। ऐसे गुण अपनाने से व्यक्ति समाज में भी आदरणीय बनता है।
शिविर में बड़ी संख्या में साधक एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे और उन्होंने सत्र को प्रेरणादायी बताया।

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