होम / बड़ी ख़बरें / विलंब से धान खरीदी के कारण वजन में कमी होने से किसानों को 3 हजार करोड़ रूपए की आर्थिक क्षति
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-निर्धारित समय 31 जनवरी और खरीदी करने के लिए बचे धान को आधार बनाकर प्रतिदिन का कोटा निर्धारित किया जाये
-रबी फसल के लिए समितियों में तत्काल खाद उपलब्ध कराया जाये
दुर्ग। छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन की बैठक में खरीदी के एक माह के बाद की स्थिति पर विचार किया गया। बैठक में माना गया कि धान खरीदी की पुनर्निर्धारित लिमिट अपर्याप्त है और इस गति से धान खरीदी के लिए निर्धारित तिथि 31 जनवरी तक बचे हुए धान की सरकारी खरीद संभव नहीं है लिहाजा धान खरीदी के शेष बचे हुए दिनों और मात्रा को आधार बनाकर प्रतिदिन धान खरीदी का लिमिट निर्धारित किया जाना चाहिए।
बैठक में कहा गया है कि धान खरीदी की धीमी गति और विलंब से धान खरीदी के कारण वजन में 10% तक की क्षति होने का अनुमान है जिसके कारण किसानों को 3 से 5 हजार करोड़ रुपए का नुक़सान हो सकता है। बैठक में सरकार को आगाह किया गया है कि किसी भी स्थिति में पूर्व निर्धारित 31 जनवरी तक सभी किसानों का धान खरीद करने का लक्ष्य पूरा किया जाये और अंतिम तिथि को न बढ़ाया जाए।
किसान संगठन की बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई कि समितियों में खाद उपलब्ध नहीं होने से किसान समय पर रबी फसलों की बोवाई नहीं कर पा रहे हैं जिससे किसानों को आर्थिक क्षति होगी अतः तत्काल समितियों में खाद उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
बैठक में अनाज के अलावा अन्य फसल विशेष रूप से आईल पाम के किसानों की समस्या पर भी चर्चा हुई और कहा गया है कि फेंसिंग, ट्यूबवेल, ड्रीप सिस्टम सहित अंतरवर्तीय फसल और रखरखाव के लिए धोषित सहायता अनुदान राशि का समय पर किसानों को भुगतान किया जाये।
बैठक में रूपेंद्र दिल्लीवार, संतु पटेल, गिरिश दिल्लीवार, मनोज मिश्रा, कल्याण सिंह ठाकुर, आई के वर्मा, राजकुमार गुप्त के अलावा बालोद जिले से एस के माहेश्वरी शामिल हुए।
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