छत्तीसगढ़

मोटर दुर्घटना पीड़ितों के मुआवजे के लिए मध्य प्रदेश न्यायपालिका द्वारा “मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) के लिए दावाकर्ता प्रतिपूर्ति और जमा प्रणाली का डैशबोर्ड” लॉन्च

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बालाघाट । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के कार्यपालक अध्यक्ष एवं सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, माननीय न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने मोटर दुर्घटना पीड़ितों के लिए मुआवजे को तेज और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, 21 सितंबर 2025 को नालसा, नई दिल्ली में “मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) के लिए दावाकर्ता प्रतिपूर्ति और जमा प्रणाली का डैशबोर्ड” लॉन्च किया।
यह पहल माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 22 अप्रैल 2025 के आदेश के अनुपालन में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा विकसित की गई है। इस आदेश को स्वतः संज्ञान रिट याचिका (सिविल) संख्या 7, 2024 के तहत जारी किया गया था।
        सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि ई-कोर्ट परियोजना के केंद्रीय परियोजना समन्वयक, या उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार (कंप्यूटर/आईटी), संबंधित राज्य सरकारों की सहायता से, एक डिजिटल डैशबोर्ड बनाएंगे। इसमें मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और कर्मचारी (वर्कमेन) मुआवजा अधिनियम, 1923 के तहत दिए गए मुआवजे से संबंधित जमा राशि की जानकारी, पूरी जानकारी के साथ नियमित रूप से अपलोड की जाएगी।
       इस कार्यक्रम में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी, माननीय न्यायमूर्ति आलोक अराधे, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधीश एवं मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन, और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति विवेक रूसिया तथा माननीय न्यायमूर्ति आनंद पाठक उपस्थित थे।
     लॉन्च के अवसर पर  न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “यह प्लेटफॉर्म न्याय वितरण को आम नागरिकों के लिए तेज, सरल और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम है। दुर्घटना के दर्द से जूझ रहे परिवारों को वह पाने के लिए देरी या जटिल प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ना चाहिए जो उनका अधिकार है। मध्य प्रदेश की न्यायपालिका ने इस प्रणाली को जल्दी और प्रभावी ढंग से लागू करने में उल्लेखनीय प्रतिबद्धता दिखाई है। उनका काम अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण स्थापित करता है।”
     मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण पूरे राज्य में एमएसीटी मामलों की निगरानी करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मुआवजा बिना देरी के दावाकर्ताओं तक पहुंचे। अधिकारियों ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के दावाकर्ताओं के लिए फायदेमंद होगा, जिन्हें अक्सर मामलों का पालन करने या धन तक पहुंचने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। 
        कार्यक्रम में जिला न्यालालय बालाघाट से ऑनलाइन माध्यम से विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी एक्ट) रघुवीर प्रसाद पटेल, प्रथम जिला न्यायाधीश गौतम सिंह मरकाम, द्वितीय जिला न्यायाधीश दीप नारायण सिंह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष सिंह, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण  सतीश शर्मा न्यायिक मजिस्ट्रेट,  अविनाश छारी, श्रीमती तारा मार्को, श्रीमती शिखा शर्मा, शुभम जैन, श्रीमती शिनी जैन, जिला विधिक सहायता अधिकारी जीतेन्द्र मोहन धुर्वे  उपस्थित रहे ।

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