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मध्यप्रदेश
-बिहार एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश
नईदिल्ली । बिहार में चुनाव आयोग द्वारा की जा रही मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वो फॉर्म 6 में दिए गए 11 दस्तावेजों के अलावा आधार कार्ड को भी मान्यता दे। हालांकि, कोर्ट ने स्ढ्ढक्र की समय सीमा बढ़ाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर भारी प्रतिक्रिया आती है तो इस पर विचार किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची में नाम जोडऩे के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने कहा, सभी पार्टियों के बीएलए उन 65 लाख लोगों की सूची चेक करें, जिनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। हम 14 अगस्त के आदेश को दोहराते हैं और कहते हैं कि वे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और किसी भी प्रकार के शारीरिक तौर पर आवेदन की जरूरत नहीं है।
कोर्ट को चुनाव आयोग ने जानकारी दी कि 22 लाख मतदाता मृत हैं और 7 लाख डुप्लीकेट हैं। इस पर कोर्ट ने कहा, हम मानकर चलते हैं कि 22 लाख वोटर मृत हैं, लेकिन डुप्लीकेट क्यों? यह आयोग का कर्तव्य है कि वह डुप्लीकेट ईपीआईसी ना होने दे और जो लोग बिहार से बाहर भी ईपीआईसी रखते हैं उनका हटाए। कोर्ट ने बिहार सीईओ को आदेश दिया कि वो राजनीतिक पार्टियों के अध्यक्ष और महासचिव को नोटिस जारी करें।
सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक पार्टियों की निष्क्रियता पर हैरानी जताई। कोर्ट ने कहा, हम आश्चर्यचकित हैं कि 1.6 लाख बीएलए राजनीतिक पार्टियों के हैं और उनकी तरफ से आपत्तियां नहीं आ रही। वो आपत्तियां और दावे करें। हर मतदाता का अधिकार है कि वो मतदाता बनने का आवेदन करे और आपत्ति भी दर्ज कराए। पार्टियों को इनकी सहायता करनी चाहिए। पार्टियां बीएलए को निर्देश दें कि वो मतदाताओं की सहायता करें।
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