होम / दुर्ग-भिलाई / कास्य कला बोर्ड (कांसा) गठन करने सीएम से मांग
दुर्ग-भिलाई
दुर्ग। छग शासन द्वारा समाजिक स्तर पर पुस्तैनी धंधा को मजबूत बनाने व विलुप्त होते व्यापार को आगे बढ़ाने आयोग, बोर्ड, मंडल गठित कर समाज को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। जैसे माटीकला बोर्ड, केशकला बोर्ड, रजत मंडल, तेलघानी बोर्ड, मछुवारा मंडल आदि का गठन कर इस व्यवसाय से जुड़े समाज के व्यक्तियों को शसक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी तारम्मय में पूर्व पार्षद एवं दुर्ग जिला थोक उपभोक्ता सहकारी भंडार के अध्यक्ष विनोद ताम्रकार ने कहा कि कांसा (कास्य) मंडल आयोग का गठन करने की मांग किया है। जिसमें कांसे पीतल के बर्तन बनाने वाले यह समाज अपनी जीविका के लिए यह कार्य गृह उद्योग, लघु उद्योग के रूप में अपने निवास स्थान पर आंगन या एक कमरे में आज भी बर्तन थाली, लोटा, ग्लास, गुंडी, हंडा बनाने का कार्य कर रहे है।
श्री ताम्रकार ने कहा कि वर्तमान में यह व्यवसाय विलुप्त के कगार पर पहुंच रहा है। क्योंकि शासन स्तर पर इस गृह उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कोई ठोस पहल आज तक नहीं हो पाया है और यह कार्य ताम्रकार समाज, कसेर समाज, कसार समाज के लोग अपनी जीविका के लिए कांसा, पीतल के बर्तन बना रहे हैं। यह कार्य दुर्ग, धमधा, मुंगेली, राजनांदगांव आदि स्थान पर गृह उद्योग के रूप में कर रहे है। श्री ताम्रकार ने कहा कि कांसे, पीतल के बर्तन बनाने वाले के लिए राज्य सरकार कांसा कला बोर्ड का गठन करें, जिससे इस समाज के लोगों को एक नया जीवन मिलेगा और शासन इनके द्वारा निर्मित बर्तनों को सहकारी समितियों के माध्यम से बिक्री की योजना बनाती है तो यह पुस्तैनी धंधा बरकरार रहेगा। इन समाज से जुड़े विलुप्त हो रहे कांसे के व्यापार को बचाया जा सकता है। इससे बोर्ड या मंडल से समाज से जुड़े व्यक्ति को नया जीवन और यह विशेष स्थान मिलता है तो इस व्यवसाय को प्रबलता मिलेगी।
पूर्व पार्षद विनोद ताम्रकार ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिख कर यह मांग किया है कि ताम्रकार समाज, कसेर समाज के उत्थान के लिए इस पुस्तैनी धंधा को बचाने के लिए कास्य कला बोर्ड(कांसा) या मंडल का गठन करने की मांग की है।
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