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कुओं और तालाबों के संरक्षण के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग

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-कांग्रेस के पूर्व पार्षदों ने जलकुंभी से अटे तालाब का किया निरीक्षण
दुर्ग।
प्राचीन काल से पेयजल और निस्तार के सर्वसुलभ साधन रहे कुओं और तालाबों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। जिसका दुष्परिणाम यह है कि भूजल स्तर साल दर साल गिरता जा रहा है। अत: सरकार को इन प्राकृतिक जल स्त्रोतों कुंए, तालाब और नदियों के संरक्षण व संवर्धन के लिए ठोस कार्ययोजना बनानी चाहिए। यह मांग करते हुए नगर निगम दुर्ग में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अब्दुल गनी, लिखन साहू, पूर्व पार्षद अमृत लोढ़ा, संजय सिंह, भोला महोबिया, मनोज चंद्राकर, मनीष यादव, डॉ. छत्रसाल गायकवाड, राजकुमार वर्मा, युवराज ठाकुर, महेश्वरी ठाकुर आदि  ने एक विज्ञप्ति में कहा है कि दुर्ग शहर के लगभग 50-60 तालाबों में अधिकांश जलकुंभी से अटे पड़े हैं। अवैध कब्जो के कारण कई तालाबों का अस्तित्व भी संकट मे पड़ रहा है। मोहल्ले का गंदा पानी तालाबों में जाने के कारण ये तलाब इंसानों क्या मवेशियों के निस्तार के योग्य भी नहीं है। यही हाल शहर के पुराने लगभग 100-150 सार्वजनिक व निजी कुओं का है जो रखरखाव के अभाव में अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं। इंदिरा मार्केट सहित कई प्राचीन कुओं का उपयोग डस्टबीन के रुप में हो रहा है। दुर्ग शहर की जीवनदायिनी कही जाने वाली शिवनाथ नदी के किनारे भी अवैध कब्जे बढ़ रहे हैं। अवैध रेत उत्खनन के कारण और आसपास ईंट भट्टे लगने से तथा पंप लगाकर पानी की चोरी करने की वजह से शिवनाथ का जलस्तर गिरता जा रहा है। जिससे गर्मी के दिनों में शहर में गंभीर पेयजल संकट की स्थिति निर्मित होती है। सरकार सालों से जल संवर्धन और संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च करती है लेकिन उसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। जोगी डबरी, सरोवर धरोहर और नरवा गरवा घुरवा बारी सहित कई योजनाएं बनी लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही निकला। नदी व तालाबों से जलकुंभी को हटाने नगर निगम लाखों की लागत पांड क्लीनर मशीन भी खरीदी लेकिन जलकुंभी नहीं हट पा रही है। कांग्रेस के पूर्व पार्षदों ने मांग की है कि इसके लिए राज्य सरकार वृहद कार्ययोजना बनाए अन्यथा प्राकृतिक जल संसाधनों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा और निकट भविष्य में इसका गंभीर दुष्परिणाम भुगतना पड़ेगा।

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