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राज्य के बजट से किसानों की अपेक्षाएं

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दुर्ग। वित्त मंत्री ओ पी चौधरी कल विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विधानसभा में बजट पेश करने वाले हैं स्वाभाविक रूप से प्रस्तावित बजट से किसानों को बड़ी अपेक्षाएं हैं।
राज्य की कुल आबादी का लगभग 70% गांव में निवास करते हैं जिनके आय का मुख्य साधन खेती किसानी है बजट से किसानों को आशा है कि लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए के संभावित बजट का लगभग 40% से 50% कृषि, किसान और ग्रामीण विकास के लिए आबंटित किया जायेगा।
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के संयोजक राजकुमार गुप्त ने कहा कि बजट से दशा और दिशा का ज्ञान होना चाहिए वर्तमान में कृषि, इस पर आधारित लोगों और किसानों की दशा सबसे अधिक खराब है, धान को छोड़कर अन्य कृषि उपजों, अनाज, दलहन, तिलहन, सब्जी आदि से सुनिश्चित आय की कोई गारंटी नहीं है जिसका खामियाजा खेती किसानी से जुड़े लोगों को भुगतना पड़ता है। खेती किसानी करने वालों को अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, सिंचाई के लिए बिजली, पानी, खाद,बीज,दवा के अलावा समय पर श्रमिकों और कृषि यंत्रों की उपलब्धता और बाजार, राज्य के बजट में इन समस्याओं को दूर करने पर प्राथमिकता के साथ विचार करना और समुचित व्यवस्था बनानी होगी।
लगभग प्रत्येक गांव और किसान प्राथमिक सहकारी समितियों से जुड़े हैं जिन्हें पैक्स सोसाइटी के रूप में जाना जाता है, बजट में इन समितियों को और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए, वर्तमान में इन समितियों का काम ऋण, खाद, बीज उपलब्ध कराने और धान खरीदी करने तक ही सीमित है इनके दायरे का विस्तार किया जाना चाहिए और इसे कृषि और कृषक कल्याण सेवा के रूप में परिवर्तित किया जाना चाहिए जहां कृषि विशेषज्ञ उपलब्ध कराया जाना चाहिए जो जरूरत मंद किसानों का मार्गदर्शन करे, पौधों में बीमारी लगने की स्थिति में इन केंद्रों में असरकारी दवा भी उपलब्ध होने चाहिए, ऐसे केंद्र में धान के मिलिंग की सुविधा भी उपलब्ध होने चाहिए, समिति क्षेत्र के गांव के धान का मिलिंग आवश्यकता के अनुसार उसी केंद्र में किया जाना चाहिए और पीडीएस योजना के अंतर्गत उसी क्षेत्र के उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा में वितरित किया जाना चाहिए इससे धान के भंडारण, परिवहन, मिलिंग, चांवल के भंडारण और वितरण में किये जाने वाले अनावश्यक खर्चों को और नुकसान को बचाया जा सकता है। इन केंद्रों में आवश्यकता के अनुसार किसानों को जैविक खाद और कीटनाशक भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि किसानों को रसायन मुक्त अनाज के उत्पादन के लिए प्रेरित किया जा सके। बाजार में अनाज के भाव के उतार चढ़ाव से किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा करने के लिए अनाज के समुचित भंडारण और कम क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज की स्थापना भी इन केंद्रों में किया जा सकता है।
वर्तमान में कृषि में असंतुलन की स्थिति निर्मित हो गई है इसे संतुलित करने के लिए और राज्य को अनाज की उपलब्धता में आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए जिससे किसान सिर्फ धान की खेती करने से हतोत्साहित हो और अन्य उपज लेने के लिए प्रोत्साहित हो, दलहन तिलहन और अन्य उपज को लाभकारी बनाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
सब्जी उत्पादक किसानों को बाजार की शक्ति की सर्वाधिक मार झेलनी पड़ती है कभी भाव अर्श पर होते हैं और कभी धड़ाम से फर्श पर गिर पड़ते हैं, सब्जी कच्चा उपज है जिसे भंडारित करना आसान नहीं है, जिन समितियों के क्षेत्र में सब्जियां प्रचुर मात्रा में उत्पादन होता है उन समिति केंद्रों में आवश्यकता के अनुसार कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जाना चाहिए।
किसानों को समय पर श्रमिकों की अनुपलब्धता की समस्या का सामना करना पड़ता है पंचायत को रोजगार केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए जहां किसानों की मांग पर कृषि कार्य और भूमि सुधार के लिए जी राम जी में पंजीकृत श्रमिक उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
पशुपालन, डेयरी और पोल्ट्री को मजबूत बनाने की दिशा में भी काम और खर्च किए जाने चाहिए।

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