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केन्द्रीय बजट में सहकारिता क्षेत्र को बड़ी सौगात, किसानों को मिलेगा सीधा लाभ: बेलचंदन

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दुर्ग। भारत की अर्थव्यवस्था में सहकारिता की भूमिका को इस वर्ष के केन्द्रीय बजट में सशक्त और औपचारिक मान्यता दी गई है। यह बजट इसलिए विशेष माना जा रहा है क्योंकि इसमें सहकारी संस्थाओं को कृषि, ग्रामीण विकास और किसान कल्याण की केन्द्रीय एवं महत्वपूर्ण इकाइयों के रूप में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है। बजट ज्ञापन में सहकारिताओं के लिए दिए गए विशेष लाभों हेतु समर्पित खण्ड शामिल किया गया है, वहीं वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में भी सहकारिता क्षेत्र की भूमिका और महत्व को प्रमुखता से रेखांकित किया।
दुर्ग जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन ने कहा कि यह बजट किसानों और सहकारी समितियों की जमीनी वास्तविकताओं की गहरी समझ को दर्शाता है। इसी क्रम में एक अहम सुधार के तहत प्राथमिक सहकारी समितियों को आयकर में कटौती की सुविधा प्रदान की गई है, जो अपने सदस्यों द्वारा उत्पादित कपास बीज एवं पशु आहार की आपूर्ति करती हैं। कपास की खेती और डेयरी गतिविधियां ग्रामीण आजीविका के प्रमुख साधन हैं तथा पशु आहार और कपास बीज इन क्षेत्रों के अत्यंत महत्वपूर्ण इनपुट हैं। इस कटौती से प्राथमिक सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और इसका सीधा लाभ बेहतर कीमतों, बेहतर सेवाओं और सशक्त संस्थानों के रूप में किसानों तक पहुंचेगा।
प्रमुख बजटीय प्रावधान इस प्रकार हैं—
? पशु आहार और कपास बीज आपूर्ति पर कर कटौती
अब उन प्राथमिक सहकारी समितियों को भी लाभ एवं आय में कटौती की सुविधा मिलेगी, जो संघीय सहकारी समिति, सरकारी संगठनों आदि को पशु आहार और कपास बीज की आपूर्ति करती हैं। वर्तमान में यह सुविधा दूध, तिलहन, फल एवं सब्जियों की आपूर्ति करने वाली समितियों को ही प्राप्त थी।
? मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी को मान्यता
मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी अधिनियम, 2002 के अंतर्गत पंजीकृत सहकारी समितियों को आयकर अधिनियम की धारा 2(32) के तहत सहकारी समिति की परिभाषा में शामिल किया जाएगा। यह संशोधन 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और कर वर्ष 2026-27 से लागू होगा।
? नई कर व्यवस्था में लाभांश पर राहत
नई कर व्यवस्था के तहत सहकारी समितियों को अन्य सहकारी समितियों से प्राप्त लाभांश आय पर कर कटौती की अनुमति दी गई है, बशर्ते यह लाभांश आगे अपने सदस्यों को वितरित किया जाए। इससे सहकारी ढांचे में दोहरी कराधान की समस्या समाप्त होगी और आय सीधे सदस्यों तक पहुंचाने को प्रोत्साहन मिलेगा।
समग्र रूप से यह बजट एक सशक्त संदेश देता है कि देश में सहकारिताओं का महत्व तेजी से बढ़ा है और अब इसे नीति स्तर पर पूरी तरह स्वीकार किया गया है। स्पष्ट कानूनी मान्यता, निष्पक्ष कर व्यवस्था और लक्षित प्रोत्साहन अधिक से अधिक सहकारी समितियों को आगे आने, अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार करने और देशभर में व्यवसाय बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगे। अंततः इससे सहकारी आंदोलन मजबूत होगा और सामान्य किसान समुदाय का समग्र उत्थान सुनिश्चित होगा।

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