दुर्ग। जिले में जल जीवन मिशन अंतर्गत ग्राम रुदा में निर्मित प्रस्तावित ओवरहेड टैंक को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक-7 के ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रभारी कार्यपालन अभियंता उत्कर्ष पांडेय पर गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर दुर्ग को एक विस्तृत पत्र सौंपा है। पत्र में व्यंग्यात्मक अंदाज में अभियंता को “विश्व का आठवाँ अजूबा रचने” वाला बताते हुए उन्हें भारत रत्न देने की “अनुशंसा” की गई है। यह पत्र अब जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम रुदा में जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल पहुंचाने के लिए ओवरहेड टैंक का निर्माण ठेकेदार कमल कुमार अग्रवाल को 7.85% अबोव एसओआर पर आबंटित किया गया था। एस्टीमेट के अनुसार यह कार्य 12.49 लाख रुपये में RCC टैंक के रूप में स्वीकृत था। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा RCC स्ट्रक्चर तो बना दिया गया, लेकिन ऊपर की टंकी का निर्माण नहीं किया गया, जबकि भुगतान पूरा कर दिया गया।
मामला राष्ट्रीय मीडिया में उजागर होने के बाद, प्रभारी ईई उत्कर्ष पांडेय ने लागत कम करने का हवाला देते हुए RCC टैंक के स्थान पर जिंक-एल्युमिनियम एलाई की टंकी लगाने का प्रस्ताव तैयार किया। आरोप है कि रिवाइज्ड एस्टीमेट में लागत कम होने के बजाय 12.95 लाख रुपये की स्वीकृति दे दी गई, जिससे शासन को लगभग 46 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों और प्रतिनिधियों का आरोप ..
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि— यह बदलाव जिला जल जीवन मिशन अध्यक्ष (कलेक्टर) की स्वीकृति के बिना किया गया, जो नियम विरुद्ध है।
धातु की टंकी सतह पर रखने से पानी जंग के संपर्क में आएगा और जनस्वास्थ्य को खतरा होगा।
लागत घटाने के नाम पर लागत बढ़ाना, एसओआर बदलकर भुगतान करना, और ग़ैर-नियमानुसार टंकी बदलना विभागीय कदाचार का मामला है।
पूरे जिले में लगभग 300 टंकियों में से केवल एक स्थान पर ऐसा परिवर्तन हुआ, वह भी मीडिया में मामला आने के बाद।

व्यंग्यात्मक शैली में भारत रत्न की अनुशंसा ..
युवा कांग्रेस नेता धर्मेश देशमुख, उपाध्यक्ष (दुर्ग ग्रामीण), द्वारा कलेक्टर को दिए गए पत्र में इंजीनियर पांडेय को—
“विश्व का आठवाँ अजूबा रचने वाला”
“ऐतिहासिक इंजीनियरिंग का निर्माता”
“धरोहर संरचना के अविष्कारक”
बताते हुए उन्हें 26 जनवरी 2025 को भारत रत्न देने की अनुशंसा करने का अनुरोध किया गया है।
इसके साथ ही इस अनूठी टंकी को लिम्का बुक और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज कराने की “सिफारिश” भी पत्र में शामिल है।
कलेक्टर से क्या है मांग?
पत्र में कलेक्टर से निम्न मांगें की गई हैं—
1. इस “चमत्कारिक संरचना” को प्रदेश और देश की धरोहर घोषित किया जाए।
2. रिवाइज्ड एस्टीमेट और निर्माण कार्य की जांच की जाए।
3. विभागीय कदाचार पर कड़ी कार्रवाई हो।
4. मामले को राज्यपाल के संज्ञान में भेजा जाए।
युवा कांग्रेस नेता ने यह भी उल्लेख किया कि शीघ्र ही राज्यपाल के नाम हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।
विवाद तेज, प्रशासन मौन ..
ग्रामीणों के अनुसार आज दिनांक तक इस प्रकरण में न तो कोई जांच शुरू हुई है और न ही विभागीय कार्रवाई। इससे प्रशासन की “मौन सहमति” पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
PMO को भी भेजी प्रतिलिपि ..
इस पत्र की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री कार्यालय के जॉइंट सेक्रेटरी, नई दिल्ली को भी भेजी गई है।
यह पूरा मामला अब जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाओं के केंद्र में है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण पर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
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