गणित में कमजोर मंत्री, अबकारी के अधिकारियों ने भर ली जेब

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Ro No. 12027-89

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-अधिक फ्लोराइड वाला पानी पीने या ज्यादा फ्लोराइडयुक्त जल से सिंचित खाद्यान्नों से होता है फ्लोरोसिस -जिला चिकित्सालयों, सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में फ्लोरोसिस की स्क्रीनिंग और इलाज की सुविधा -पेयजल में एक पीपीएम होनी चाहिए फ्लोराइड की मात्रा दक्षिणापथ, रायपुर। स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल तथा स्वस्थ खाना अच्छी सेहत के लिए सबसे जरूरी चीजों में से हैं। स्वच्छ और सुरक्षित पानी नहीं पीने से कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। फ्लोरोसिस भी असुरक्षित पेयजल से होने वाली एक गंभीर बीमारी है जो शरीर में अत्यधिक फ्लोराइड की मौजूदगी के कारण होता है। यह बीमारी अधिक फ्लोराइड वाला पानी पीने से या ज्यादा फ्लोराइडयुक्त जल से सिंचित खाद्यान्नों के सेवन से होता है। फ्लोरोसिस के कारण शरीर की हड्डियां विकृत व टेढ़ी हो जाती हैं। फ्लोरोसिस के मुख्य लक्षण राज्य फ्लोरोसिस नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने से दांतों में पीलापन, समय से पहले दांतों का खराब होना, शरीर की हड्डियों में विकृति व टेढ़ापन सामान्य रूप से देखे जाते हैं। दांतों का रंग बिगडऩा, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द होना, हाथों और पैरों का आगे की तरफ या पीछे की तरफ मुड़ जाना, लंबी दूरी तक चलने में असमर्थ होना, पेट में दर्द होना और पेट फूलना भी इस बीमारी के लक्षणों में शामिल हैं। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम नियमित रूप से फ्लोरोसिस से ग्रसित गांव जाकर फ्लोरोसिस से पीडि़त लोगों की जानकारी जुटाती है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से स्कूल स्तर पर छात्र-छात्राओं में फ्लोरोसिस की जाँच की जाती है। उन्होंने बताया कि पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा एक पीपीएम होना चाहिए। इससे अधिक मात्रा में फ्लोराइड का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। फ्लोरोसिस से बचाव डॉ. अग्रवाल ने बताया की प्रदेश के सात जिलों रायपुर, महासमुंद, बालोद, कोरिया, कांकेर, कोरबा और कोंडागांव में फ्लोरोसिस की समस्या अधिक है। खून या पेशाब की जांच करवाकर शरीर में फ्लोराइड की मात्रा की जाँच की जा सकती है। प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में फ्लोरोसिस की स्क्रीनिंग और इलाज की सुविधा है। साथ ही बालोद, कोंडागांव, कोरबा, कांकेर, रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, बस्तर, गरियाबंद, सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर में फ्लोरोसिस की जांच के लिए प्रयोगशाला स्थापित हैं। फ्लोरोसिस से बचाव के लिए फिल्टर किया हुआ पानी, नल का पानी व सतही जल पीना चाहिए। कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन-सी युक्त भोजन कम करने से फ्लोरोसिस की संभावना बढ़ जाती है। हमें अपने भोजन में भरपूर मात्रा में फल, हरी पत्तेदार सब्जियां और दूध को शामिल करना चाहिए।