मंत्री श्री अकबर ने छेरछेरा में किसानों को दिया धान का दान

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Ro No. 12027-89

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दक्षिणापथ, (पवन देवांगन)। अगले साल राज्य का आम चुनाव होना है। कांग्रेस तो सीधे लड़ेगी, पर भाजपा को अपना रुख तय करने में भारी संशय हो रहा है। बीते पौने चार सालों में राज्य स्तर का एक सर्वमान्य नेता तक खोज नहीं पाई है, जिसकी अगुवाई मे चुनाव लड़ी जा सके।बीते सालों में छत्तीसगढ़ बीजेपी ने जाति, क्षेत्र व करिश्माई व्यक्तित्व जैसों ऐंगल से भी उन राहों की तलाश की है, जो राज्य सत्ता की दहलीज पर पार्टी को पहुंचा सके। पर कांग्रेस व भूपेश के सामने प्रमुख विपक्षी बीजेपी ठीक से खड़ी नही हो पा रही है। भूपेश सरकार की तुलना जनता आज यदि रमन सरकार से करती है तो उसे नितांत छत्तीसगढ़िया भूपेश सरकार ज्यादा भा रहा है। कांग्रेस की भूपेश सरकार आम जनों तक पहुंचने में शिद्दत से कामयाब हुई है। जबकि अभी चुनाव को 20 महीने बाकि है और चुनावी पिटारा खुलना शेष है। ऐसे में भुपेश का सामना कर पाने योग्य नेता भाजपा में खोजे नही मिल रहा है। ऊपर से हाल के नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों ने भाजपा को और भी सकते में ला दिया है। बहरहाल, राजनीतिक प्रेक्षक भलीभांति महसूस कर रहे है कि अंडर ग्रास चलने वाला छत्तीसगढ़ियावाद जमकर हिलोरे मार रही है। इसकी अनदेखी भारी नुकसान देगी। दूसरी ओर भूपेश सरकार छत्तीसगढ़ियावाद का पर्याय बन चुकी है। ऐसे में बृजमोहन अग्रवाल, सरोज पांडे, प्रेमप्रकाश पांडेय, अमर अग्रवाल जैसे गैर छत्तीसगढ़िया नेताओ की अगुवाई को बेहतर जनप्रतिसाद मिल पाना नामुमकिन लग रहा है। लिहाजा, शुद्द छत्तीसगढ़िया भाजपाई नेता की तलाश पार्टी की प्राथमिक जरूरत है। इस पंक्ति में नजर डाले तो विजय बघेल, नंकुमार साय, रामविचार नेताम, धरमलाल कौशिक, अजय चंद्राकर जैसे नाम तो जरूर आते हैं, पर भूपेश के सामने जिन्हें दृढ़ता से खड़े किए जा सके, वह सर्वमान्य नेता कोई नही दिखता। अलबत्ता, विजय बघेल में वह क्षमता जरूर है, पर भूपेश के सामने अधिकांश मोर्चो पर वे उन्नीस साबित होते दिखे हैं।