दूसरों की सलाह पर ही न करें बदलाव

कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन के कारण अभी देश में संभावनाएं कम हो गयी हैं। ऐसे में रोजगार की राह देख रहे युवाओं को धैर्य रखने के साथ ही अपनी दक्ष्यता बढ़ानी होगी। लॉकडाउन के कारण रोजगार में भी कमी आने की आशंका है पर युवाओं को निराश होने की जरुरत नहीं है।

कैरियर बनाने के दौरान कई बार हमें सफल होने के लिए लोग सलाह देने लगते हैं। ऐसे लोगों का मानना रहता है इनकी वजह से हम खुद के प्रति रक्षात्मक हो जाते हैं और ऐसा व्यवहार करने लगते हैं, जैसे हम कुछ गलत काम कर रहे हों और हमें अपना रवैया या तौर-तरीका सुधारने की बहुत आवश्यकता है। यहां पर यह कहना सही नहीं होगा कि दूसरों के नजरिये या सुझाव हमेशा बेकार होते हैं पर हमें कोई भी बात आंख बंद कर स्वीकार नहीं करनी चाहिये हो सकता है जो बदलावा एक के लिए ठीक रहते हैं वह जरुरी नहीं दूसरे के लिए भी सफल ही रहें।

भीड़ से अलग होना

एक क्षण के लिए सोचें कि हम जीवन को लेकर अलग तरीके से व्यवहार करते हैं, हमारी शुरुआत अलग होती है और हमारे जीवन के अनुभव भी अलग ही होते हैं।

सलाह देना बन रहा चलन

लोगों को बदलाव की सलाह देना आजकल का चलन बनता जा रहा है। जरूरत से ज्यादा भावनाएं दर्शाने पर आप पर स्वभाव को लेकर एक प्रकार का ठप्पा लग सकता है।

दूसरों के लिए बदलने का क्या मतलब

हमारी आदत है कि हम प्रोत्साहन को देखकर प्रतिक्रिया करते हैं। वर्ष 2011 में एक शोध हुआ कि कैसे समाज में सक्रिय लोग अपने व्यवहार में बदलाव लाते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो लोग इस बात को लेकर ज्यादा परेशान रहते हैं कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। जो लोग अवसाद में होते हैं, वे अपने बारे में ज्यादा बेहतर जानते हैं, बजाय उनके जो अवसादग्रस्त नहीं हैं।

एकदम बदलाव संभव नहीं

खुद को बदलना रातोंरात संभव नहीं होता, ना तो यह नए हेयर स्टाइल से संभव है और न ही वजन घटाने से या मस्तमौला दिखने से। बेशक इन बातों से हमें अच्छा महसूस हो सकता है, लेकिन हमारी आदतें और जीवनशैली वही रहेंगी और रह-रह कर तब तक उभर कर सामने आती रहेंगी, जब तक हम उन पर पूरी तरह से काबू नहीं पा लेते।

ईश्वर का उपहार है हमारा अनूठापन

दूसरे हमें स्वीकार करें, इस दिशा में प्रयास करते हुए कई बार हम यही नहीं समझ पाते कि ऐसा करके हम तनाव में आ रहे हैं या राहत महसूस करते हैं? हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि अपनी बेहतरी के लिए कोई प्रयास ही नहीं करें। हम जिस तरह से अनूठे हैं, वह एक तरह से ईश्वर का हमें दिया उपहार है। इसे भी संजोएं।

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