रावण बनाने वाले कलाकार 78 वर्षीय राजपाल लुम्बा आज भी थके नही

दक्षिणापथ, रायपुर। राजपाल लुंबा…तस्वीर में दिख रहे 78 साल के मेहनती कलाकार का यही नाम है। रायपुर के WRS कॉलोनी दशहरा मैदान में हर साल रावण की जो भव्य और बेहद सुंदर प्रतिमा हम सभी देखते हैं, पिछले 52 सालों से प्रतिमा का निर्माण राजपाल लुंबा ही करते आ रहे हैं। बंगाल में जन्मे, रेलवे की नौकरी लगी तो छत्तीसगढ़ आना हुआ और यहीं के हो गए। बचपन में पड़ोसी तेलुगू परिवार को रावण की प्रतिमा बनाते देखा, फिर रामलीला भी देखी और रावण से काफी प्रभावित हो गए। 1970 में रायपुर में नेशनल क्लब बनाया और कलाकारों के साथ मिलकर 30 फीट की रावण की मूर्ति बनाकर यहां दान की। 1974 में इस काम ने बड़ा स्वरुप ले लिया, WRS कॉलोनी मैदान में दशहरा उत्सव के लिए रेलवे से चंदा इकट्ठा किया जाता था, रेलवे से ही कागज, सामान और पेंट दिया जाता था जिससे लुंबा जी और उनकी टीम रावण, कुंभकरण और मेघनाद की प्रतिमा बनाया करते थे। 100 फुट से भी ज्यादा बड़ी रावण प्रतिमा बनाकर रिकॉर्ड भी कायम किया। इस बार मेघनाद और कुंभकरण तो नहीं बने हैं WRS कॉलोनी मैदान में, लेकिन हर साल की तरह राजा-महाराजा सरीखे लंकापति रावण की बेहद खूबसूरत प्रतिमा सजकर तैयार हो रही है। लुंबा जी कहते हैं रेलवे में क्लर्क से सफर शुरू किया और ऑफिसर बनकर रिटायर हुए, लेकिन कलाकारी से रिटायर होने का वक्त कभी नहीं आएगा। वे साल में एक बार WRS कॉलोनी ग्राउंड में रावण का पुतला बनाने के लिए जरुर आते हैं। रावण के चरित्र से वे काफी प्रेरित हैं, कहते हैं कि वे मूर्ति बनाने से पहले और बाद में इसकी पूजा भी करते हैं उनका मानना है कि विद्वानी, बलशाली रावण अमर फल लेकर आया था, उसे मोक्ष के लिए राम से बैर लेना पड़ा तब श्रीराम ने संधार किया और रावण बैकुंठ गया। आज लुंबा जी के साथ छत्तीसगढ़ के नौजवान मूर्तिकार कलाकार इस काम में लगे हुए हैं, हर साल बिना किसी आमदनी के निस्वार्थ भाव से दशहरा उत्सव के लिए इनकी टीम मूर्ति तैयार करती है।

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