राहत शिविर के मजदूर, जिला प्रशासन एवं उनकी टीम के प्रति हुए कृतज्ञ

राजनांदगांव। कोरोना वायरस कोविड-19 के विश्वव्यापी दुष्प्रभाव को रोकने के लिए हमारे देश में लॉकडाउन किया गया है। छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन की वजह से विभिन्न राज्यों के श्रमिक तथा मजदूर अपने घरों तक नहीं पहुंच पाए। राजनांदगांव जिले के महाराष्ट्र बार्डर के सड़क चिरचारी के राहत शिविर में लॉकडाउन की स्थिति में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, ओड़ीशा सहित अन्य राज्यों के श्रमिकों और जरूरतमंद लोगों को रखा गया है। कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य ने इन श्रमिकों की देखरेख एवं उनकी राहत के लिए युद्ध स्तर पर कार्य करने का बीडा उठाया। जंगलों से विभिन्न स्थानों से विषम परिस्थितियों में फंसे हुए इन श्रमिकों को एक ही स्थान पर लाकर उनके लिए सुविधाएं उपलब्ध कराना चुनौतिपूर्ण रहा। लेकिन कलेक्टर श्री मौर्य एवं उनकी टीम ने दिन-रात एक कर सेवा भावना के साथ इन श्रमिकों को अपने परिवार का हिस्सा मानते हुए कार्य किया गया। यही वजह है कि आज इस राहत शिविर में मजदूर अपने आपको परिवार से दूर होने के बावजूद यहां के लोगों को अपना मान रहे हैं और उन्हें खुश होने का अहसास भी है।

कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य के मार्गदर्शन में लॉकडाउन में विभिन्न राज्यों के लोगों के लिए जिले के महाराष्ट्र सीमा के सड़क चिरचारी के वन डिपो में राहत शिविर का संचालन किया जा रहा है। शिविर में रह रहे लोगों के लिए भोजन और आवास की समुचित व्यवस्था की गई है। पेयजल और चलित शौचालय के प्रबंध किए गए हैं। मनोरंजन के लिए विभिन्न खेलों और एलईडी तथा डीजे भी लगाए गए हैं। शिविर स्थल पर पानी की टंकियां लगाई गई है। यहां पर क्रिकेट व फुटबॉल खेलने की सुविधा दी जा रही है। 24 घंटे इलाज की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। पुलिस सहायता केन्द्र के साथ जगह-जगह मोबाईल चार्जिंग के लिए स्वीच लगाई गई है। सुबह नाश्ते के साथ दोपहर और रात में भोजन की व्यवस्था की गई है। लोगों को समय पर नाश्ता और खाना दिया जा रहा है। शिविर स्थल पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया है। जगह-जगह डस्टबिन भी रखे गए हैं। स्नान और पेयजल के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी की आपूर्ति की जा रही है। डिपो के बड़े-बड़े हॉल में पंखे और कुलर भी लगाए गए है। राहत शिविर में निवासरत लोगों ने जिला प्रशासन द्वारा की गई विभिन्न व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया। अनेक लोगों ने चर्चा में कहा कि अनजान लोगों के लिए जिला प्रशासन द्वारा पारिवारिक माहौल दिया जा रहा है। किसी भी समस्या की जानकारी देने पर तत्काल उसका निराकरण किया जाता है। पर्याप्त लाईट की व्यवस्था की गई है।

जिला पलामू झारखंड के राहुल कुमार ने बताया कि काम करने के लिए नागपुर गए थे। नागपुर से पैदल ही लौट रहे थे। जिला प्रशासन राजनांदगांव के अधिकारियों ने हमें राहत शिविर में रखा है। यहां पर हर प्रकार की जरूरी सुविधा दी जा रही है। बहरहाल अपने घर से सैकड़ो किलो मीटर दूर रह रहे हैं तो घर की याद तो आ ही रही है। लेकिन इस राहत शिविर में मिल रहा पारिवारिक माहौल भी घर से कम नहीं है। यहां लोग आपसी सदभाव से रह रहे हैं और एक-दूसरे की सहायता भी कर रहे हैं। शिविर में हम जैसे अनजान लोगों को हर समय खुश रखने की कोशिश की जा रही है। यहां पर परिवार जैसे माहौल है। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक शिविर स्थल में आते है और हमारा हालचाल पूछते हैं। राहुल कुमार ने बताया कि हमें उम्मीद से ज्यादा सुविधा मिल रही है। यहां पर 24 घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जरूरत पड़ने पर तुरंत ही डॉक्टरों द्वारा स्वास्थ्य जांच की जाती है। मनोरंजन के लिए क्रिकेट और फुटबॉल खेलने के प्रबंध किए गए हैं। काफी अच्छी व्यवस्था की गई है। राहुल ने बताया कि सबसे बड़ी बात शिविर में किसी प्रकार से भेदभाव नहीं किया जाता। हमें अभी तक एहसास भी नहीं हुआ कि हम लोग दूसरे राज्यों के निवासी है। उन्होंने बताया कि शिविर में एक अप्रैल से रह रहे हैं।

मलकानगिरी ओड़ीशा के संतोष ने बताया कि हम लोग रोजी-मजदूरी के सिलसिले में हैदराबाद गए थे। वहां से काम नहीं मिलने पर मध्यप्रदेश के दमोह गए। भवन निर्माण के कार्य में लगे थे, उसी समय अचानक लॉकडाउन की जानकारी मिली। फिर वहां काम मिलना बंद हो गया। किराए के वाहन से हम लोग घर जा रहे थे। सीमा पार करने के बाद जिला प्रशासन द्वारा हमें राहत शिविर में ठहराया गया है। यहां पर भोजन और आवास की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

झारखंड के गढ़वा जिले के बबलू शर्मा ने बताया कि हमारा 60 लोगों का दल है। काम के लिए नागपुर गए थे। कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते नागपुर में काम बंद हो गया। हमारा दल नागपुर से लौट रहा था। जिला प्रशासन द्वारा लॉकडाउन का हवाला देते हुए सड़क चिरचारी के राहत शिविर में हमें रखा गया है। भोजन, आवास की अच्छी व्यवस्था है। दैनिक उपयोग की अन्य जरूरी चीजों के अलावा हमें कपड़ा तक भी दिया गया है। हमें समय बिताने के लिए खेल और मनोरंजन की सुविधा भी प्रदान की गई है। हम खाना बनाना चाहे तो हमें तुरंत राशन सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।

झारखंड के गढ़वा जिले के ही शिव कुमार राम ने बताया कि हम लोग नागपुर से पैदल ही लौट रहे थे। बार्डर पर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने हमें शिविर में रखा गया है। यहां 16 दिन से हैं, यहां पर भोजन, आवास के साथ साफ-सफाई की पर्याप्त व्यवस्था है। सुबह समय पर नाश्ते में पोहा, तरबूज, केला दिया जाता है। दोपहर और रात को खाना भी दिया जा रहा है।

झारखंड के गढ़वा जिले के आर्यन कुमार भारती भी राहत शिविर की व्यवस्था से पूरी तरह संतुष्ट दिखे। उन्होंने बताया कि नागपुर में अचानक हमें कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण लॉकडाउन होने की जानकारी मिली। हम पैदल ही घर जाने के लिए निकल पड़े। छत्तीसगढ़ की सीमा पर हमें रोका गया और राहत शिविर में ठहराया गया है। यहां पर 14-15 दिन से क्वारेंटाईन सेन्टर में रखा गया है। शिविर में आने के बाद हमें परिवार का माहौल मिला। किसी भी समस्या का तुरंत निराकरण किया जाता है। बिना कहे ही प्रशासन द्वारा सारी व्यवस्थाएं की जा रही है। शिविर स्थल में भोजन, आवास तथा अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाएं मिल रही है।

पलामू झारखंड के उमलेश कुमार ने बताया कि राहत शिविर में 14-15 दिन से रूके हैं। नागपुर से पैदल ही लौट रहे थे। नागपुर में पिछले दो महीने से भवन निर्माण के काम में मजदूरी कर रहे थे। राहत शिविर में खाने व रहने की सबकुछ अच्छी व्यवस्था है। पीने के लिए पानी की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

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