एडीबी बैंक भारत को 2.2 अरब डॉलर की सहायता देगा

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दक्षिणापथ, दुर्ग। ग्रामीण हलकों में कोरोना जांच को लेकर आमजनों में यह भ्रांति फैल गई है कि टेस्ट कराने पर मेडिकल टीम जानबूझकर रिपोर्ट possitive दे रही है। इसलिए लोग सैंपल देने से कतरा रहे है। कदाचित मेडिकल टीम को दुर्व्यवहार का सामना भी करना पड़े तो हैरत की बात नही। उल्लेखनीय है, दुर्ग जिले के ग्रामीण क्षेत्रों मे स्वास्थ विभाग ने घर घर जाकर परिवार के कम से कम एक व्यक्ति का कोरोना टेस्ट करने मुहिम शुरू किया है, ताकि संक्रमण की दर को समय रहते रोक लिया जाए। मगर जिला मुख्यालय के आसपास के ग्रामीण हलकों में ऐसी सोच पैदा हो गई है कि जो भी व्यक्ति अपना टेस्ट कराएगा, उसकी रिपोर्ट कोरोना संक्रमित दे दिया जा रहा है। हालांकि ग्रामीण एंटीजन या कॉन्फॉर्मेन्ट्री टेस्ट का मतलब ठीक ढंग से नही समझते , पर मन मे यह जरूर बैठ गया है कि सैंपल देने पर रिपोर्ट पोसिटिव ही आएगा। इस चक्कर मे घर घर जाने वाले कोविड मेडिकल टीम को गांव वाले सैम्पल देने से इंकार कर रहे है। लोगो मे यह बात भी चल रही है कि प्रति कोरोना पेशेंट एक लाख से ज्यादा रुपये इलाज के लिए सरकार स्वस्थ्य महकमे को दे रही है, इसलिए ही स्वास्थ्य विभाग के लोग ज्यादा से ज्यादा लोगो को कोरोना संक्रमित बताने में लगे हुए है ताकि मुनाफा कमा सके। यद्यपि हकीकत में यह तथ्य सही नही है। स्वास्थ्य विभाग किसी को जानबूझकर गलत रिपोर्ट दे, यह बात बेमानी है। पर यह तो जरूर पता चलता है कि आमजनों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति जबरदस्त भरोसे का संकट पनप गया है। पहले भी चिकित्सा पेशा पर हमारे देश मे उंगली उठती रही है, पर कोरोना के संकट काल मे इसकी संकल्पना भयादोहन स्वरूप में सामने आ रहा है, बेशक यह व्यवस्था की डराने वाली तस्वीर है। इससे पता चलता है कि सरकार के सामने चुनौती कितनी भारी है। सोशल मीडिया के इस युग मे प्राइम लाइन पर क्या चल रहा है इससे आमजन अंजान नही है। अस्पतालों की दुर्दशा व कोरोना मरीजो से होने वाले व्यवहार के vdo कमोबेश हर दिन वायरल हो रहे है। अस्पताल में भर्ती अपने किसी परिजन की मौत की खबर रोते-रोते जब कोई व्यक्ति वायरल करता है और उस मौत का जिम्मेदार अस्पताल वालो को ठहराता है, तो ऐसे वीडियोस का नाकारात्मक असर पड़ना स्वाभविक है। आजकल सोशल मीडिया में हर दिन ऐसी खबरें व वीडियो क्लिप आ रहे है। बहरहाल, स्वास्थ्य विभाग कई चुनोतियो का सामना करना पड़ रहा है। आरोप लगाना हमेशा आसान होता है, पर फ्रंट लाइन पर कोरोना से जंग लड़ने वाले कर्मवीर ही असली योद्धा है। उनका मनोबल बना रहेगा, तभी कोरोना से जंग जीती जा सकेगी।