तबलीगी जमात से लौटे 16 की पहचान कर क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया

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Ro No. 12111/89

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दक्षिणापथ, नगपुरा (दुर्ग)। आज श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ नगपुरा में तीर्थंकर श्री नेमिनाथ प्रभु का जन्मकल्याणक प्रसंग पर मेरू महोत्सव मनाया गया। कविकुल किरीट व्याख्यान वाचस्पति जैनाचार्य श्रीमद् विजय लब्धि सूरीश्वर जी महाराजा की पुण्यतिथि प्रसंग पर गुणानुवाद सभा आयोजित हुई। सभा को संबोधित करते हुए पूज्य मुनिराज श्री प्रशमरति विजय जी म. सा.(देवर्धि साहेब) ने कहा कि तीर्थंकर श्री नेमिनाथ प्रभु का जन्म शौरीपुर में यदुवंश में हुआ था । श्री नेमिनाथ प्रभु बालब्रम्हचारी थे। श्री नेमिनाथ प्रभु की आराधना ब्रम्हचर्य के पालन में अतिशय प्रभावी है। गुजरात गिरनार तीर्थ में श्री नेमिनाथ प्रभु की 11 लाख वर्ष प्राचीन प्रतिमा जी है, ऐसी मान्यता है। जैनाचार्य श्री लब्धि सूरी जी महाराज संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान थे। गुजरात के अनेक राजा आपसे प्रभावित थे। आप बाजार-चौराहों में खड़े-खड़े जाहिर प्रवचन देते थे। आपने अनेकों जैनेत्तर भाई बहनों को उपदेश देकर शाकाहारी बनाया। डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन, काका कालेकर आदि राजनेता आपके गुणवत्ता के कायल थे।

संस्कृत में बहुत से साहित्य रचना किए जिसमें "द्वादशार नयचक्र" का पुनरुद्धार के साथ ही सूत्रार्थ मुक्तावली, समत्ति तर्क, वैराग्य रस मंजरी ग्रंथ विशिष्ट रूप से आपकी महत्ती रचना है। पूज्य श्री लब्धि सूरी दादा महान विभूति,मूर्धन्य महाकवि एवं कविकुल किरीट के रुप में प्रतिष्ठित हैं। अपनी काव्य एवं संगीतमयी सरसपद रचना के कारण आपका क्षेत्र धर्म-सम्प्रदाय और भाषा की सीमाओं को तोड़कर समस्त जन मानस में व्याप्त रहा है। आज लब्धि सूरिदेव के गेय पदों को बड़े उल्लास के साथ भगवद भक्ति में गान किया जाता है। आपके प्रवचन के प्रभवो गुणानुवाद सभा में धर्मेश जैन परभणी ने गुरूभक्ति गीत प्रस्तुत किए। तीर्थ अध्यक्ष गजराज पगारिया, मैनेजिंग ट्रस्टी पुखराज दुगड़, ट्रस्टी भीखमचंद कोठारी, पन्नालाल गोलछा, ने भावपुष्पांजलि अर्पित किए। आज , 8 बजे तीर्थ के मेरूपर्वत में श्री नेमिनाथ प्रभु का जन्माभिषेक किया गया। अभिषेक के पश्चात वाद्ययंत्रों, बैंड की मधुर ध्वनि के साथ वरघोड़ा (शोभायात्रा) निकाला गया। तीर्थ में कल से प्रारंभ हो रहे त्रिदिवसीय श्री पार्श्व प्रभु मोक्ष कल्याणक उत्सव( मंत्र यंत्र साधना) निमित्ते अखण्ड दीपक, मंगल कलश, ज्वारारोपण का विधान सम्पन्न हुआ।कल विशिष्ट औषधियो से श्री उवसग्गहरं पार्श्व प्रभू का अठ्ठारह अभिषेक महापूजन होगी।