कोरोना वायरस पर PSL फ्रैंचाइजी मालिक के रवैये पर भड़के शोएब अख्तर, सुनाई खरी-खोटी

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Ro No. 12111/89

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दक्षिणापथ, रायपुर। समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने मीडिया के माध्यम से देश की जनता के समक्ष एक बड़ी समस्या को उजागर करते हुए कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण केवल किसान ही नहीं अपितु देश की जनता भी इसके भयावह परिणाम भुगतने को तैयार रहे, क्योंकि जिस प्रकार प्रकृति द्वारा दिए गए जल के स्रोतों के बावजूद भी आज पेयजल भी बंद बोतलों में व्यापारियों के हाथों बाजार में बिक रहा है, ठीक उसी प्रकार किसानों की ज़मीनें और उनके अधिकार भी मोदी सरकार के व्यापारिक मित्रों के हाथ में आते ही, आम जनता की थाली में परोसा जाने वाला भोजन भी कई गुना महंगा हो जाएगा।

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि जिस प्रकार आज से 25 साल पहले जल सभी को मुफ्त में मिलता था और लोग बीमारी मुक्त भी रहते थे उसी प्रकार पहले अनाज भी लोगों की थाली तक सहज ही पहुंच जाया करता था क्योंकि सरकारों की नीतियाँ किसानों के हितों में थीं। लेकिन धीरे धीरे जैसे पीने का पानी भी व्यापारियों द्वारा बोतलों में बंद कर दें बिकने लगा और महंगा हो गया, ठीक उसी प्रकार मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण जब व्यापारियों के हाथ में अनाज चला जाएगा तो उसका परिणाम भी देश की आम जनता को ही भुगतना पड़ेगा। क्योंकि हमारी थाली में परोसा जाने वाला भोजन भी उसके बाद कई गुना ज्यादा महंगा हो जाएगा। लेकिन विडंबना यह है कि हमारे देश के विपक्ष को यह बात समझ में नहीं आ रही है। वह किसानों के आंदोलन का तो समर्थन कर रहे हैं लेकिन इस बात के बारे में नहीं सोच रहे हैं कि इसका असर आम जनता के जेब पर भी पड़ने वाला है। इसीलिए विपक्ष के साथ-साथ देश के प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना होगा कि किसानों का आंदोलन केवल उनका आंदोलन नहीं है यह देश के आम आदमी का आंदोलन है, जिसके लिए देश के आम आदमी को भी आंदोलित होने की जरूरत है।

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा है कि आज छत्तीसगढ़ की सरकार ने किसानों के लिए बहुत से काम किए है। अगर छत्तीसगढ़ की सरकार 2 साल में किसानों के लिए इतना काम कर सकती है तो केंद्र सरकार के पास तो बहुत से अधिकार हैं। अगर केंद्र की नियत साफ़ है तो किसानों और आम जनता के हक में बहुत से सकारात्मक कार्य किए जा सकते हैं। लेकिन समझने वाली बात यह है कि केंद्र सरकार की नीयत और नीति दोनों में ही खोट नजर आ रही है। इसीलिए 6 सालों में ही देश की स्थिति बद से बदतर बन चुकी है फिर चाहे वह आतंकवाद का मामला हो, नक्सलवाद का मामला हो, अर्थ नीति का मामला हो, बेरोज़गारी का मामला हो, स्वास्थ्य सुविधाओं का मामला हो, महिला सशक्तिकरण का मामला हो, महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार रेप - बलात्कार - महिला उत्पीड़न का मामला हो, या अब मज़दूरों और किसानों के हितों की रक्षा का मामला हो, हर मामले में केंद्र सरकार अब तक विफल नजर आई है। इस पर आम जनता को सोचने की जरूरत है।

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि असल में मोदी सरकार के व्यापारिक मित्रों की नजर कृषि उद्योग पर इसलिए पड़ी है क्योंकि कोरोना काल में हुए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण देश की जीडीपी में जब 24 प्रतिशत की गिरावट आई थी तो उस समय भी कृषि उद्योग और इस क्षेत्र ने चार प्रतिशत की उन्नति दिखाई थी, इसीलिए अब वे इस क्षेत्र को हड़पना चाहते हैं। लेकिन एक कृषि प्रधान देश में अगर कृषि भी व्यापारियों के हाथ में चली गई तो इसका भुगतान आम जनता को ही भुगतना पड़ेगा। इसलिए देश सचेत रहे।

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा है कि, 'आज मैं छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव द्वारा किसानों के हित में रखे गए उपवास का भी समर्थन करता हूं और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करता हूं कि वे छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार द्वारा किसानों के हित में उठाए गए कदमों और नीतियों से सीखते हुए देश में भी किसानों के हित में नीति लाए वरना देश की जनता को इसके परिणाम भुगतने होंगे।