Oldest Military Pensioner Died: देश की सबसे बुजुर्ग 116 साल की मिलिट्री पेंशनर बचन कौर का निधन, ब्रिटिश सेना में कार्यरत थे पति

  • उनके पति ब्रिटिश औपनिवेशक शासन के दौरान सेना में कार्यरत थे, दोनों विश्व युद्ध में हिस्सा ले चुके थे
  • 116 की उम्र में बचन कौर को हर महीने 24,000 रुपये की पेंशन, बैंड-बाजा से निकाली गई अंतिम यात्रा

चंडीगढ़
देश की सबसे उम्रदराज सैन्य पेंशनर कहीं जाने वालीं बचन कौर का शुक्रवार को निधन हो गया। वह 116 साल की थीं। उनके पति ब्रिटिश औपनिवेशक शासन के दौरान सेना में शामिल थे। वह बलूचिस्तान में कार्यरत थे जो अब पाकिस्तान में स्थित है। वह पंजाब के मोहाली जिले के मोटे माजरा गांव में रहती थीं।

ब्रिटिश सेना में रहते हुए उनके पति गनर जीवन सिंह दोनों विश्व युद्ध में हिस्सा लिया था। आर्टिलरी रेजिमेंट में लगभग 20 साल तक सेवा देने के बाद 17 दिसंबर 1945 में रिटायर हो गए थे। वह बलूचिस्तान प्रांत में कार्यरत थे जो कि पाकिस्तान में है। 1991 में उनका निधन हो गया, उस वक्त उनकी उम्र 101 साल थी।

बैंड-बाजे के साथ निकाली अंतिम यात्रा
बचन कौर के परिवार ने बैंड-बाजा के साथ धूमधाम से उनकी अंतिम यात्रा निकाली। दंपती के 9 बच्चे थे जिनमें से उनकी तीन बेटियां और दो बेटे अभी जीवित हैं। एक बेटा सूबेदार प्रीतम सिंह, भारतीय सेना से रिटायर्ड हो चुके हैं और 79 साल के हैं। प्रीतम के बेटे भी सेना से रिटायर्ड हो चुके हैं और पेंशनर हैं।

आजादी से पहले से मिल रही थी पेंशन
बचन कौर को पिछले 76 साल से पेंशन मिल रही थी। वह आजादी के पहले से पेंशन की लाभार्थी रहीं। 1945 में उनके पति जीवन सिंह को हर महीने 10 रुपये की पेंशन मिलती थी। निधन से पहले जीवन सिंह को कुल 3,500 रुपये की पेंशन मिल चुकी थी। 116 की उम्र में बचन कौर को हर महीने 24,000 रुपये की पेंशन मिल रही थी।

परिवार का दावा- 1899 में पैदा हुई थीं बचन कौर
इंडियन आर्मी के रेकॉर्ड के अनुसार, बचन कौर का जन्म 1905 में हुआ था लेकिन उनके बेटे सूबेदार प्रीतम सिंह (79) ने बताया कि उनकी मां का जन्म वास्तव में अक्टूबर 1899 में हुआ था और वह 122 साल की थीं। कुछ डॉक्युमेंट्री प्रूफ के उपलब्ध न होने के चलते भारतीय सेना ने उनकी उम्र 116 वर्ष मान ली थी।

आखिरी वक्त तक सक्रिय थीं बचन कौर
प्रीतम सिंह ने बताया कि उनके परिवार ने तोपखाना अभिलेख के रेकॉर्ड ऑफिसर नासिक को सुधार के लिए पत्र भी लिखा था लेकिन कुछ नहीं हुआ। प्रीतम सिंह ने बताया कि उनकी मां आखिरी वक्त तक सक्रिय थीं और लगभग महीने भर पहले ही उन्होंने चलना-फिरना बंद कर दिया था।

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