Vaccine Campaign in India: हर व्यक्ति पर 9-9 वैक्सीन डोज जमा कर चुका है कनाडा, भारत के पास 1-1 डोज भी नहीं, प्रति व्यक्ति वैक्सीन उपलब्धता के लिहाज से पिछड़ गया भारत

  • बड़ी आबादी और भारी मात्रा में वैक्सीन के निर्यात प्रमुख कारण

नई दिल्ली. कोविड-19 महामारी भारत में नए सिरे से तबाही मचा रही है। हालत कितनी खराब है इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश में अकेले गुरुवार को 2 लाख 17 हजार से ज्यादा नए मरीज सामने आए हैं। वहीं, 1,100 से ज्यादा कोविड मरीजों की मौत हो गई। वहीं, देश में अब तक तकरीबन 11.72 करोड़ लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई जा सकी है। लेकिन, दुनिया के कई देशों ने भारत के मुकाबले अपनी आबादी के बड़े हिस्से को न केवल टीका लगा दिया है बल्कि बड़ा-बड़ा भंडार भी तैयार कर लिया है। सवाल है कि आखिर दो-दो वैक्सीन का उत्पादन करके भी भारत पिछड़ क्यों गया है?

भारत वैक्सीन खरीदने में दुनिया में नंबर दो, लेकिन…

भारत कुल 1.11 अरब वैक्सीन डोज खरीदने वाला है, लेकिन इसमें 20.55 करोड़ डोज की ही खरीदारी हो चुकी है जबकि अभी 90.45 करोड़ डोज खरीदने की संभावना है। इस लिहाज से देखें तो दुनिया में सिर्फ अमेरिका ही ऐसा देश है जिसने भारत से ज्यादा 2.51 अरब वैक्सीन डोज खरीदने जा रहा है। उसने 1.21 अरब डोज खरीद चुका है जबकि और 1.30 करोड़ डोज खरीदने की कोशिश में है।

प्रति व्यक्ति वैक्सीन डोज के लिहाज से टॉप 10 देशों में भारत नहीं
ये आंकड़े 14 अप्रैल तक के हैं। उस दिन तक उपलब्ध वैक्सीन के लिहाज से देखें तो भारत के पास अभी सिर्फ 20.55 ही उपलब्ध है। इस आंकड़े पर गौर करें तो भारत अपनी आबादी के लिहाज से प्रति व्यक्ति 0.2 वैक्सीन डोज ही खरीद पाया है। वहीं, कनाडा अपने हर नागरिक के लिए 8.7 डोज की दर से वैक्सीन का भंडार बना चुका है।

अगर इस मामले दुनिया के टॉप 10 देशों की बात करें तो प्रति व्यक्ति 7.3 डोज के साथ यूके दूसरे, 6.6 डोज के साथ न्यूजीलैंड तीसरे, 5 डोज के साथ चीली चौथे, 4.9 डोज के साथ ऑस्ट्रेलिया पांचवें, 4.6 डोज के साथ यूरोपियन यूनियन (30 से ज्यादा देशों का संगठन) छठे, 4 डोज के साथ अमेरिका सातवें, 3.1 डोज के साथ इजरायल आठवें, 2.8 डोज के साथ स्विटजरलैंड नवें जबकि 2.6 डोज के साथ दक्षिण कोरिया 10वें नंबर पर है। यानी, भारत का टॉप 10 देशों में कहीं स्थान नहीं है।

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आबादी के लिहाज से वैक्सीन की उपलब्धता की लिस्ट में भारत टॉप 10 से नीचे।
दो वैक्सीन का उत्पादन, फिर भी पिछड़े क्यों?

अब सवाल उठता है कि आखिर जब भारत दुनिया के सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता देश है और हमारे पास सीरम इंस्टिट्यूट जैसी विशालकाय वैक्सीन उत्पादक कंपनी है तो फिर हम इतने पिछड़ क्यों गए? हमारे यहां भारतीय आयुर्विज्ञान अनुंसधान परिषद (ICMR) और भारत बायोटेक (Bharat Biotech) की विकसित कोवैक्सीन (Covaxin) और ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) एवं एस्ट्राजेनेका (Astrazeneca) की ओर से विकसित कोविशील्ड (Covishield) का उत्पादन भी हो रहा है।

ऐसे में यह सवाल और भी गंभीर हो जाता है। हालांकि, इस सवाल का जवाब ढूंढते वक्त दो बातें ध्यान में रखनी होंगी- पहले ये कि हमारे देश की आबादी यूरोप और अमेरिका के बड़े से बड़े देश के मुकाबले भी कई गुना ज्यादा है और दूसरी ये कि भारत ने ‘वैक्सीन मैत्री’ के तहत दुनिया के 50 से ज्यादा देशों को वैक्सीन उपलब्ध करवाई है जिनमें करोड़ों डोज तो फ्री में दी गई हैं।


‘वैक्सीन मैत्री’ पर भी सवाल

तो क्या भारत की ‘वैक्सीन मैत्री’ की नीति पर सवाल उठाया जा सकता है और क्या यह जायज है? दरअसल, जब भारत सरकार ने वैक्सीन मैत्री शुरू की थी तब देश में महामारी का प्रकोप लगातार घटता जा रहा था। नए केस कम हो रहे थे, पॉजिटिविटी रेट घट रहा था, मौतें भी कम हो रही थीं और कुल मिलाकर लग रहा था कि धीरे-धीरे कोरोना काबू में आ जाएगा। हालांकि, मार्च के दूसरे हफ्ते से महामारी ने अपना रंग फिर से दिखाना शुरू किया और अब तो इसने अपनी चाल से सबको हैरान कर दिया है। तो बदली परिस्थितियों में कहा जा सकता है कि ‘वैक्सीन मैत्री’ गलत थी और भारत सरकार को सबसे पहले अपने नागरिकों के लिए ज्यादा से ज्यादा वैक्सीन की भंडार जमा करना चाहिए था।

हालांकि, ‘वैक्सीन मैत्री’ की नीति पर इसलिए सवाल जरूर उठाया जा सकता है कि भारत ने ज्यादातर वैक्सीन की बिक्री है, मुफ्त में बहुत कम डोज दी है। आंकड़े तो यह भी बताते हैं कि पिछले महीने के आखिरी हफ्ते में भारत ने जितनी वैक्सीन डोज अपने नागरिकों को दी थी, उससे कहीं ज्यादा डोज का निर्यात कर दिया था। 24 मार्च तक की बात करें तो भारत ने 76 देशों को 6 करोड़ डोज निर्यात किया था जबकि देश में सिर्फ 5.1 करोड़ डोज ही खर्च की गई थी।


देश में बिगड़ते हालात

भारत में पिछले 24 घंटे में कोविड के 2,17,353 नए मामले आने के बाद कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 1,42,91,917 हुई। 1,185 नई मौतों के बाद कुल मौतों की संख्या 1,74,308 हो गई है। वहीं, अब तक कुल 11,72,23,509 लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई जा सकी है। देश में सक्रिय मामलों की कुल संख्या 15,69,743 है और डिस्चार्ज हुए मामलों की कुल संख्या 1,25,47,866 है।

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