कैट ने ई-कॉमर्स कंपनियों की लॉक डाउन क्षेत्रों में गैर जरूरी वस्तुओं को बेचने की मांग पर कड़ा एतराज जताया

दक्षिणापथ, दुर्ग। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश उपाध्यक्ष पवन बड़जात्या, प्रदेश एमएसएमई प्रभारी मोहम्मद अली हिरानी,प्रदेश मीडिया प्रभारी संजय चौबे, दुर्ग जिला इकाई अध्यक्ष प्रहलाद रूंगटा ने बताया कि कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने एक मीडिया रिपोर्ट जिसमें कहा गया है की कुछ प्रमुख बड़ी ई कॉमर्स कंपनियां, जिन राज्यों के विभिन्न क्षेत्रों जहाँ में कर्फ्यू अथवा लॉक डाउन लगा है उनमें अपने ई कॉमर्स पोर्टल के द्वारा गैर जरूरी सामन बेचने की अनुमति मांग रही है, को बेहद अनावश्यक और व्यापारियों के ताबूत में कील ठोकने जैसे काम करना बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कैट ने कहा है की ये कंपनियां खुद एवं अपने कथित लॉबी ग्रुप के माध्यम से राज्य सरकारों और केंद्र सरकार पर दबाव बनाकर भारत के व्यापारियों को तहस नहस करने पर तुली हैं। कैट ने इस सम्बन्ध में आज केंद्रीय वाणिज्य मंत्री श्री पियूष गोयल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत सहित देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक पत्र भेजकर इन ई-कॉमर्स कंपनियों की इस नापाक मांग को एक सिरे से खारिज करने की मांग की है।
कैट के प्रदेश मीडिया प्रभारी संजय चौबे ने कहा की अगर ई-कॉमर्स कंपनियों को गैर-जरूरी सामान बेचने की अनुमति दी जाती है तो व्यापारियों को भी कर्फ्यू अथवा लॉक डाउन वाले क्षेत्रों में गैर जरूरी सामान बेचने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा की ऐसा नहीं हो सकता की ई कॉमर्स कंपनियां तो व्यापार करती रहें और देश के व्यापारी जो भारत के बेटे हैं वो अपनी दुकाने बंद रख कर सरकार के नियमों का पालन करते रहे। देश का कानून एवं नियम सबके लिए एक हैं और किसी वर्ग विशेष को इसमें तरजीह नहीं दी जा सकती है क्योंकि यह न्याय के प्राकृतिक सिद्धांत के विरुद्ध होगा।
कैट के जिला अध्यक्ष श्री प्रहलाद रूंगटा ने यह भी उल्लेख किया है कि ऐसे समय में जब आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर अन्य सभी दुकानें लॉकडाउन या कर्फ्यू के अधीन हैं, तो ई-कॉमर्स पोर्टल्स क्यों यह सामन बेचेगा। ऐसी क्या जरूरत है। एफडीआई पालिसी में किसी भी ई-कॉमर्स पोर्टल जो मार्केटप्लेस है, को इन्वेंट्री के मालिक होने की अनुमति नहीं है और जो विक्रेता उनके साथ पंजीकृत हैं वे भी तो अपनी दुकाने बंद रखेंगे ऐसे में ई-कॉमर्स कंपनियां कैसे गैर जरूरी सामन बेच पाएंगी और अगर वो ऐसा करती हैं तो इसका मतलब है कि वे मार्केटप्लेस नहीं है और सरकार की एफडीआई नीति का उल्लंघन कर रहे हैं।
श्री प्रहलाद रूंगटा ने कहा कि पूरा देश जानता है कि भारत के छोटे खुदरा विक्रेताओं द्वारा जब भी आपदा पड़ने पर सदैव आगे बढ़कर राष्ट्र की सेवा की है और पिछले लॉक डाउन में विषम परिस्थितियों में अपने जीवन को खतरे में डालकर और देश भर में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई को निर्बाध रूप से जारी रखा था जबकि यही ई-कॉमर्स कंपनियां चुपचाप गायब हो गई । इन सब स्तिथियों को देखते हुए और व्यापार में समान अवसर की प्रतिस्पर्धा को बरकार रखने के लिए इन ई-कॉमर्स कंपनियों को जो कि जरूरी सामान की बिक्री करने की अनुमति बिलकुल नहीं देनी चाहिए ।

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