Oxygen Cylinder Crisis in Mumbai: कोरोना संकट के बीच ऑक्सिजन के लिए हाहाकर, तीन गुने महंगे मिल रहे सिलेंडर, लोग खुद ही कोविड-19 संक्रमित मरीजों के लिए प्राइवेट सिलेंडर खरीदकर ले जा रहे हैं

मुंबई . बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच ऑक्सिजन सिलेंडर की डिमांड भी बढ़ गई है। देश भर के कई हिस्सों से अस्पतालों में ऑक्सिजन की किल्लत की खबरें सामने आ रही हैं। अब लोग खुद ही संक्रमित मरीजों के लिए प्राइवेट सिलेंडर खरीदकर ले जा रहे हैं। मुंबई में ऑक्सिजन की कई गुना मांग बढ़ जाने के कारण जंबो ऑक्सिजन सिलेंडर और उसकी रिफिलिंग के दाम आसमान छू रहे हैं। यहां सिलेंडर के दाम तीन गुना तक बढ़ गए हैं।

अस्पताल के हेड का कहना है, ‘वेंडर ने मुझे बताया कि उसे ऑक्सिजन सिलेंडर के लिए काफी पैसा देना पड़ रहा है इसलि वह हमसे भी अधिक रुपये वसूल रहा है।’ डॉक्टर का कहना है कि लिक्विड ऑक्सिजन सप्लाइ के दामों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। खारगड़ के निरामय अस्पताल के डॉ. अमित ठतानी ने बताया कि जिन अस्पतालों के पास लिक्विड सिलेंडर नहीं है उन्हें जंबो सिलेंडर पर ही निर्भर होना पड़ रहा है।

छोटे अस्पतालों को करना पड़ रहा स्ट्रगल
उन्होंने बताया, ‘कुछ अस्पतालों ने सिंगल जंबो सिलेंडर के रिफिलिंग के लिए 2,500 रुपये तक अदा किए हैं जबकि कई छोटे अस्पतालों को समय पर रिफिलिंग के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।’

केमिकल और फर्टिलाइजर मंत्रालय ने सितंबर महीने में मैन्युफैक्चरर की ओर से लिक्विड मेडिकल ऑक्सिजन के एक्स फैक्ट्री दाम 15.22/CUM (जीएसटी छोड़कर) तय किए थे जबकि फिलर की ओर से मेडिकल ऑक्सिजन सिलेंडर के दाम 25.71/CUM तय किए थे। यह अगले छह महीनों के लिए थे। ठडानी ने बताया कि वेंडरों ने सिलेंडर के ऐक्चुअल दामों में बढ़ोत्तरी नहीं की है लेकिन ट्रांसपोर्टेशन और लेबर चार्ज बढ़ा दिए हैं।

नवी मुंबई मनपा के पास 20 दिन की अतिरिक्त ऑक्सिजन
कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मनपा आयुक्त अभिजीत बांगर ने अस्पतालों में ऑक्सिजन और बेड का जायजा लेते हुए बताया कि मनपा के पास ऑक्सिजन और बेड्स की कमी नहीं है। आपात स्थिति के लिए 20 दिन की अतिरिक्त ऑक्सिजन मनपा के पास है। इस दौरान आयुक्त ने लिक्विड टैंक को भी जल्द से जल्द स्थापित करने का निर्देश अधिकारियों को दिया है।

गाजियाबाद से मिल रहा लखनऊ को ऑक्सिजन
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ऑक्सिजन की कमी हो रही है। दो दिन पहले प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ऑक्सिजन की कमी हो गई थी। कोरोना मरीजों को ऑक्सिजन नहीं मिल रही है। अफरातफरी में लखनऊ से आदेश आया कि गाजियाबाद ऑक्सिजन की आपूर्ति करे। इसके बाद यहां से 20-20 टन के दो टैंकर लखनऊ भेजे गए हैं। फिलहाल लखनऊ में ऑक्सिजन की जरूरत गाजियाबाद से पूरी की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के अलावा दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान तक यहां से ऑक्सिजन की सप्लाइ की जा रही है।

रेट में नहीं हुई है कोई बढ़ोतरी
पिछले साल जब कोरोना का प्रकोप बढ़ा था तो भी ऑक्सिजन की डिमांड काफी बढ़ गई थी। तब तक गाजियाबाद वाले प्लांट का उत्पादन नहीं शुरू हुआ था। इसलिए मनमानी तरीके से ऑक्सिजन का रेट बढ़ा दिया गया था। लेकिन इस बार सरकार ने रेट को फिक्स कर दिया है। इसलिए अभी तक डिमांड बढ़ने के बाद भी इसकी कीमत नहीं बढ़ी है। यशोदा अस्पताल के एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिसर आशीष अग्रवाल का कहना है कि ऑक्सिजन की डिमांड काफी बढ़ी है। लेकिन अभी पुराने रेट पर ही सिलेंडर मिल रहा है।

प्रदेश का है सबसे बड़ा ऑक्सिजन प्लांट
मोदीनगर के अंतर्गत भोजपुर क्षेत्र में ऑक्सिजन बनाने वाले इस हाइटेक प्लांट को पिछले साल शुरू किया गया था। यह प्लांट उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा है। यहां रोजाना ऑक्सिजन गैस के 15 हजार सिलिंडर भरे जाएंगे। वर्ष 2019 जनवरी माह में प्लांट का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। जिसने अक्टूबर महीने में उत्पादन शुरू कर दिया था। प्लांट का निर्माण आईनॉक्स एयर प्रॉडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा कराया जा रहा है। इसकी क्षमता 150 टन की है। मालूम हो कि गाजियाबाद में पहले से भी एक ऑक्सिजन प्लांट है, लेकिन उसकी क्षमता करीब 80 टन है।

8 टन के करीब हो गई है डिमांड
सामान्य दिनों में दिल्ली एनसीआर में उद्योगों और मेडिकल क्षेत्र में चार से पांच टन के ऑक्सिजन की डिमांड होती है। लेकिन इन दिनों यह बढ़कर आठ से दस टन तक पहुंच गई है। फिलहाल इस प्लांट के लग जाने से आपूर्ति में कोई बाधा नहीं हो रही है।

गुड़गांव में तीन गुना तक वसूले जा रहे दाम
गुड़गांव में कुछ सप्लायरों के पास छोटे सिलिंडरों की कमी होने की बात सामने आ रही है। गैस सिलिंडर उपलब्ध नहीं होने पर लोग ऑक्सिजन कंसरडेटर किराये पर ले रहे हैं। ऑक्सिजन कंसरडेटर नहीं मिलने पर भी लोग इन्हें खरीदने के लिए सप्लायर्स से संपर्क कर रहे हैं। दूसरी ओर गैस सिलिंडर रिफिलिंग की कीमत तीन गुना तक वसूली जा रही है।

सिलिंडरों की आने लगी है कमी
वी केयर मेडी सर्विस के संचालक दिगंबर रैना ने बताया कि रोज काफी लोगों के कॉल गुड़गांव ही नहीं दूसरे राज्यों से भी आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि 10 किलो और 50 किलो वाले ऑक्सिजन सिलिंडर किराये पर दिए जाने का काम ज्यादा रहता है। डिमांड बढ़ने पर काफी सप्लायरों के पास सिलिंडर खत्म हो गए हैं। अब सप्लायर सिलिंडरों का इंतजाम करने में लगे है और आने वाले दो तीन दिन में कमी दूर हो जाएगी।

ऑक्सिजन कंसरडेटर खरीदने को तैयार
ऑक्सिजन कारोबारियों के अनुसार घरों में ऑक्सिजन के सहारे रहने वाले मरीजों के लिए ऑक्सिजन कंसरडेटर भी काफी सहायक होता है। हेल्थ केयर सर्विस से जुड़े लोग इसे जहां प्रतिमाह किराये पर उपलब्ध करा रहे हैं, वहीं काफी लोग इसे खरीदकर घर में रख रहे हैं। डिमांड बढ़ने पर कुछ लोग इसे फिलहाल 6 से 8 हजार रुपये प्रतिमाह किराये पर उपलब्ध करा रहे हैं।

किराये पर ऑक्सिजन कंसरडेटर नहीं मिलने पर लोग अब इसे खरीद भी रहे हैं। कंसरडेटर व वेंटीलेटर बनाने वाली डॉ मान लाइफ साइसेंस के डायरेक्टर नेहुल गुलिया ने बताया कि रॉ मटीरियल नहीं मिलने के कारण ऑक्सिजन कंसरडेटर का उत्पादन कम हो गया है।

बढ़ रहे हैं दाम
डिमांड बढ़ने पर कुछ लोगों ने मनमाने दाम वसूलना शुरू कर दिया है और गैस सिलिंडर रिफ्लिंग महंगा हो गया और हालांकि जिले में सप्लाई की कमी नहीं है। बताया जा रहा है कि मेडिकल ऑक्सिजन गैस के दाम जनवरी में सामान्य हो गए थे, लेकिन अब 10 किलो का सिलिंडर 600 रुपये तक में रिफिल हो रहा है जो पहले 200 रुपये तक में हो जाया करता था।

डबल हुई मांग
सिनर्जिक मेडिकल गैसेस की संचालक सुरेखा चावला ने बताया कि गुड़गांव के काफी अस्पतालों में लिक्विड ऑक्सिजन गैस का इस्तेमाल किया जाता है। फिलहाल ऑक्सिजन गैस की कोई दिक्कत नहीं हैं। पूरी सप्लाई आ रही है और डिमांड को पूरा किया जा रहा है। हमारी ओर से कोई दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। पिछले कुछ दिनों में डिमांड बड़ी है, यह मान कर चलें कि अगर पहले 200 सिलिंडर जाते थे तो अब इनकी संख्या 400 के करीब पहुंच गई है।

MP में मरीजों से कह रहे- ऑक्सिजन साथ लेकर आओ

मध्य प्रदेश में मरीजों को खुद से ऑक्सिजन सिलेंडर लाने को कहा जा रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल में मरीजों से कहा जा रहा है कि वे अपना ऑक्सिजन सिलिंडर साथ लाएं या फिर किसी दूसरे अस्पताल में भर्ती हो जाएं। बिस्तरों की भी लगातार कमी हो रही है। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अस्पतालों में जल्दी ही 24 हजार से बढ़ाकर एक लाख बेड किए जाएंगे। कई अस्पताल इस पर चिंता जता रहे हैं। एक निजी अस्पताल के डॉक्टर ने कहा कि बेड बढ़ाने से मदद नहीं मिलेगी जब तक कि ऑक्सिजन की पूर्ति नहीं होगी।

झारखंड में टास्क फोर्स का गठन
झारखंड सरकार ने कोविड-19 के तीव्र गति से बढ़ते हुए संक्रमण को देखते हुए ऑक्सीजन की निर्बाध उपलब्धता और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है। मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने बताया कि ऑक्सीजन टॉक्स फोर्स राज्य में अवस्थित ऑक्सीन उत्पादन इकाई के साथ समन्वय स्थापित करते हुए यह सुनिश्चित करेगी कि सभी जिलों में अवस्थित अस्पतालों में ऑक्सीन की निर्बाध आपूर्ति हो सके।

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